चार माह से अटकी ठोस कचरा प्रबंधन की रिपोर्ट, शासन ने कलेक्टरों को दिया
रायपुर। प्रदेश में ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था की जमीनी हकीकत सामने लाने के लिए जिलों से मांगी गई निरीक्षण एवं ऑडिट रिपोर्ट अब तक शासन तक नहीं पहुंच पाई है। रिपोर्ट भेजने में करीब चार माह की देरी के बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त रुख अपनाया है।

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणी बोरा ने सभी जिला कलेक्टरों को पत्र जारी कर लंबित निरीक्षण एवं ऑडिट रिपोर्ट सात दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से भेजने के निर्देश दिए हैं। पत्र में रिपोर्ट प्रस्तुत करने में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
शासन का उद्देश्य जिलों में ठोस कचरा प्रबंधन की वास्तविक स्थिति, कचरे के संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण एवं निपटान की व्यवस्था तथा संबंधित निकायों की कार्यप्रणाली का आकलन करना है। निरीक्षण और ऑडिट रिपोर्ट के माध्यम से व्यवस्था की कमियों और सुधार की जरूरत वाले क्षेत्रों की पहचान की जानी है।
प्रमुख सचिव ने अपने पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी है कि शासन के निर्देशों के पालन में किसी भी प्रकार की शिथिलता, विलंब अथवा कमी को राज्य शासन गंभीरता से लेगा। सभी जिला प्रशासन को निर्धारित समय-सीमा में रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
अब देखना होगा कि शासन की सख्ती के बाद लंबित रिपोर्ट निर्धारित सात दिनों में प्रस्तुत होती है या नहीं। रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रदेश में ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था की वास्तविक स्थिति और जिलों की कार्यप्रणाली को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
