बंदूक छोड़ थामी हुनर की राह, रायपुर में 9 आत्मसमर्पित महिलाओं ने कोसा
रायपुर। कभी माओवादी संगठन से जुड़कर हथियार उठाने वाली सुकमा जिले की नौ आत्मसमर्पित महिलाओं ने अब बदलाव और नई जिंदगी की मिसाल पेश की है। इन महिलाओं ने राजधानी रायपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक हथकरघा वस्त्र और कोसा सिल्क पहनकर रैंप वॉक किया। इस दौरान उन्होंने बदलते बस्तर की एक नई और सशक्त तस्वीर सामने रखी।

कार्यक्रम में महिलाओं ने आत्मविश्वास के साथ रैंप पर कदम रखा और अपने पारंपरिक परिधानों का प्रदर्शन किया। कभी हिंसा के रास्ते पर रहीं इन महिलाओं का हथकरघा वस्त्रों के साथ मंच पर उतरना पुनर्वास और मुख्यधारा में लौटने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आत्मसमर्पित महिलाओं से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने महिलाओं के संघर्ष और बदलाव की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ना साहस और नई शुरुआत का प्रतीक है।
सुकमा की इन महिलाओं ने अपने हुनर और आत्मविश्वास के जरिए यह संदेश दिया कि सही अवसर और सहयोग मिलने पर जीवन को नई दिशा दी जा सकती है। कोसा सिल्क और हथकरघा वस्त्रों में उनका रैंप वॉक बस्तर की संस्कृति, परंपरा और बदलती सामाजिक तस्वीर को सामने लाने वाला अवसर बना।
इस पहल को आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास और उन्हें सम्मानजनक जीवन से जोड़ने की दिशा में सकारात्मक कदम के तौर पर देखा जा रहा है। कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि बस्तर में बदलाव केवल सुरक्षा के मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि रोजगार, हुनर और सामाजिक पुनर्वास के स्तर पर भी दिखाई दे रहा है।
