माओवादमुक्त बस्तर में सीएपीएफ की वापसी तेज, 35 फीसदी जवान लौटे
रायपुर। बस्तर में सुरक्षा बस्तर में माओवादी गतिविधियों पर सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और अभियान के बीच अब केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के जवानों की चरणबद्ध वापसी शुरू हो गई है। जानकारी के मुताबिक बस्तर में लंबे समय से तैनात केंद्रीय बलों के करीब 35 प्रतिशत जवान अपने मूल तैनाती क्षेत्रों की ओर लौट चुके हैं। केंद्रीय बलों की वापसी कोव्यवस्था के बदलते स्वरूप से जोड़कर देखा जा रहा है।
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माओवादी प्रभाव वाले इलाकों में पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों की लगातार मौजूदगी बढ़ाई गई थी। दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए और जवानों की तैनाती के साथ माओवादी विरोधी अभियान चलाया गया। इसके परिणामस्वरूप कई क्षेत्रों में माओवादी गतिविधियों में कमी आने और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार का दावा किया गया है। अब इसी बदले हुए परिदृश्य के बीच केंद्रीय बलों की वापसी का सिलसिला शुरू हुआ है।
स्थानीय युवाओं को सुरक्षा व्यवस्था में शामिल करने की योजना
केंद्रीय बलों की वापसी के बीच राज्य सरकार ने बस्तर की सुरक्षा व्यवस्था में स्थानीय युवाओं की भूमिका बढ़ाने की योजना बनाई है। इसके तहत 5 हजार स्थानीय युवाओं को बस्तर फाइटर्स के रूप में भर्ती करने का निर्णय लिया गया है। बस्तर फाइटर्स में स्थानीय युवाओं की भागीदारी से क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और स्थानीय स्तर की जानकारी का सुरक्षा व्यवस्था में उपयोग किए जाने की उम्मीद है।
स्थानीय युवाओं को सुरक्षा बल में अवसर देने की इस पहल का एक उद्देश्य रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना भी है। बस्तर के दूरस्थ इलाकों में रहने वाले युवाओं को सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ने की योजना लंबे समय से चर्चा में रही है। हालांकि, प्रस्तावित भर्ती को लेकर अभी तक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।
भर्ती प्रक्रिया फाइलों में अटकी
सरकार द्वारा 5 हजार बस्तर फाइटर्स की भर्ती का निर्णय लिए जाने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया फिलहाल फाइलों में अटकी हुई है। केंद्रीय बलों की वापसी शुरू हो चुकी है, लेकिन उनके स्थान पर प्रस्तावित स्थानीय युवाओं की भर्ती को लेकर अगली प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। ऐसे में केंद्रीय बलों की वापसी और बस्तर फाइटर्स की प्रस्तावित भर्ती के बीच का अंतर चर्चा का विषय बन गया है।
बस्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह के बदलाव के दौरान पर्याप्त मानवबल और संसाधनों की जरूरत होती है। ऐसे में प्रस्तावित भर्ती प्रक्रिया के समय पर शुरू होने को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय युवाओं की भर्ती से न केवल सुरक्षा व्यवस्था में स्थानीय भागीदारी बढ़ सकती है, बल्कि क्षेत्र के युवाओं को रोजगार का अवसर भी मिल सकता है।
बदले सुरक्षा परिदृश्य में नई व्यवस्था की चुनौती
बस्तर में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ अभियान के दौरान केंद्रीय और राज्य सुरक्षा बलों की संयुक्त भूमिका रही है। केंद्रीय बलों की तैनाती के साथ स्थानीय पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने भी अभियान में हिस्सा लिया। अब केंद्रीय बलों की वापसी के साथ राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को स्थानीय स्तर पर और मजबूत करने की आवश्यकता सामने आ रही है।
करीब 35 प्रतिशत केंद्रीय जवानों की वापसी के बाद आने वाले समय में बाकी बलों की तैनाती को लेकर भी स्थिति महत्वपूर्ण होगी। वहीं दूसरी ओर 5 हजार बस्तर फाइटर्स की भर्ती का प्रस्ताव कब जमीन पर उतरता है, इस पर भी नजर बनी हुई है। फिलहाल केंद्रीय बलों की वापसी और प्रस्तावित स्थानीय भर्ती के बीच तालमेल स्थापित करना राज्य के लिए अहम चुनौती माना जा रहा है।
