आरक्षण केंद्र में टिकट दलाली का खेल, मुख्य वाणिज्य लिपिक गिरफ्तार
बिलासपुर। बिलासपुर रेल मंडल के करगीरोड आरक्षण केंद्र में आरक्षित रेल टिकटों की दलाली का मामला सामने आने के बाद रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने बड़ी कार्रवाई की है। आरपीएफ ने आरक्षण केंद्र में पदस्थ मुख्य वाणिज्य लिपिक चंद्रप्रकाश विश्वकर्मा को टिकट दलाली के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वह बिना किसी वैध मांग पत्र के एक निजी दलाल के लिए आरक्षित टिकट तैयार करता था और इसके बदले प्रति यात्री 200 से 300 रुपये तक कमीशन लेता था।

आरपीएफ के अनुसार, कार्रवाई के दौरान सामने आया कि करगीरोड आरक्षण केंद्र में पदस्थ कर्मचारी द्वारा नियमों को दरकिनार कर टिकट तैयार किए जा रहे थे। बताया गया कि आरोपी कर्मचारी जैतहरी निवासी दलाल वीरेंद्र केंवट के लिए आरक्षित रेल टिकट बनाने का काम कर रहा था। टिकट बनवाने के लिए यात्रियों की ओर से आवश्यक मांग पत्र प्रस्तुत नहीं किए जाने के बावजूद आरक्षण प्रक्रिया पूरी की जा रही थी।
बिना मांग पत्र बन रहे थे आरक्षित टिकट
रेलवे आरक्षण व्यवस्था में निर्धारित प्रक्रिया के तहत यात्रियों से आवश्यक जानकारी और मांग पत्र लेकर टिकट जारी किए जाते हैं। लेकिन आरपीएफ की जांच में आरोप है कि चंद्रप्रकाश विश्वकर्मा इस प्रक्रिया का पालन किए बिना दलाल के कहने पर टिकट तैयार कर रहा था। इसके बदले दलाल से उसे प्रति यात्री 200 से 300 रुपये तक कमीशन मिलता था।
मामले की जानकारी मिलने के बाद आरपीएफ ने आरक्षण केंद्र की गतिविधियों पर नजर रखी और जांच को आगे बढ़ाया। जांच के दौरान टिकट बनाने की प्रक्रिया और आरोपी कर्मचारी की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने के बाद आरपीएफ ने उसे हिरासत में लिया। पूछताछ के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई शुरू की गई।
दलाल के नेटवर्क की भी जांच
आरपीएफ अब इस पूरे मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। खासतौर पर जैतहरी निवासी बताए जा रहे दलाल वीरेंद्र केंवट से आरोपी कर्मचारी के संपर्क और टिकटों की बुकिंग के तरीके की पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि अब तक कितने यात्रियों के नाम पर इस तरह आरक्षित टिकट बनाए गए और इस गतिविधि से कितनी राशि का लेन-देन हुआ।
रेलवे में टिकट दलाली पर रोक लगाने के लिए आरपीएफ लगातार अभियान चला रही है। दलालों द्वारा जरूरतमंद यात्रियों से अतिरिक्त राशि लेकर टिकट उपलब्ध कराने की शिकायतों के बाद आरक्षण केंद्रों और ऑनलाइन टिकट बुकिंग से जुड़े मामलों पर भी निगरानी रखी जाती है।
करगीरोड आरक्षण केंद्र से जुड़े इस मामले ने रेलवे की आंतरिक व्यवस्था और आरक्षण प्रक्रिया की निगरानी पर भी सवाल खड़े किए हैं। अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस मामले में आरोपी कर्मचारी के अलावा और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा टिकट दलाली का यह नेटवर्क कितने समय से संचालित हो रहा था।
