NEET-UG 2026: OMR में गड़बड़ी के आरोप पर हाई कोर्ट सख्त, छात्र की
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने नीट-यूजी-2026 की ओएमआर शीट में हेरफेर और कम अंक दिए जाने का आरोप लगाने वाले छात्र की रिट याचिका खारिज कर दी है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की मूल्यांकन प्रक्रिया में केवल उम्मीदवार की व्यक्तिगत आशंका या संदेह के आधार पर न्यायिक हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। इसके लिए ठोस, स्वतंत्र और विश्वसनीय प्रमाण प्रस्तुत करना आवश्यक है।


चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि परीक्षा परिणाम या मूल्यांकन प्रक्रिया को चुनौती देने के लिए केवल आरोप या आशंका पर्याप्त नहीं हैं। यदि किसी अभ्यर्थी को मूल्यांकन में गड़बड़ी का दावा करना है, तो उसके समर्थन में ठोस साक्ष्य होना अनिवार्य है।
कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता अपने आरोपों के समर्थन में कोई स्वतंत्र और विश्वसनीय प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सका। ऐसे में न्यायालय के हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता। डिवीजन बेंच ने याचिका को सारहीन (Meritless) बताते हुए खारिज कर दिया।
हाई कोर्ट के इस फैसले से यह स्पष्ट संदेश गया है कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की मूल्यांकन प्रक्रिया पर बिना ठोस साक्ष्यों के लगाए गए आरोप न्यायिक समीक्षा का आधार नहीं बन सकते।
