छत्तीसगढ़ में बैंकिंग नेटवर्क को झटका, घट गई बैंक शाखाओं की संख्या
रायपुर। छत्तीसगढ़ में बैंकिंग नेटवर्क को मजबूत करने के दावों के बीच जून तिमाही के आंकड़ों ने व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। राज्य में बैंक शाखाओं की संख्या घटकर 3525 रह गई है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने के लिए काम कर रहे 52 हजार से अधिक बैंक मित्रों में से करीब 36 प्रतिशत यानी 20 हजार से ज्यादा बैंक मित्र निष्क्रिय पाए गए हैं। इससे खासतौर पर ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच और प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

जून तिमाही के आंकड़ों के अनुसार राज्य में बैंक शाखाओं की संख्या में कमी दर्ज की गई है। बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार के लिए शाखाओं के साथ-साथ बैंक मित्रों का नेटवर्क भी महत्वपूर्ण माना जाता है। बैंक मित्र ग्रामीण इलाकों में लोगों को खाते से लेनदेन, राशि निकासी, जमा और अन्य बुनियादी बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाते हैं।
लेकिन 52 हजार से अधिक बैंक मित्रों में करीब 36 फीसदी के निष्क्रिय पाए जाने से ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर सवाल खड़े हुए हैं। 20 हजार से अधिक बैंक मित्रों के सक्रिय नहीं होने का सीधा असर उन लोगों पर पड़ सकता है, जिन्हें बैंक शाखाओं तक पहुंचने में दूरी और अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
शाखाओं में कमी, बैंक मित्र भी निष्क्रिय
राज्य में बैंक शाखाओं की संख्या घटकर 3525 होना ऐसे समय में सामने आया है, जब वित्तीय समावेशन और ग्रामीण क्षेत्रों तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। बैंक शाखाओं के अलावा बैंक मित्रों को ग्रामीण बैंकिंग नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। ऐसे में बड़ी संख्या में बैंक मित्रों के निष्क्रिय रहने से उपलब्ध नेटवर्क की वास्तविक उपयोगिता पर चर्चा तेज हो सकती है।
अब चुनौती यह है कि निष्क्रिय बैंक मित्रों को दोबारा सक्रिय करने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं की नियमित उपलब्धता कैसे सुनिश्चित की जाए। साथ ही बैंक शाखाओं की संख्या में आई कमी के कारणों और इसके ग्रामीण ग्राहकों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी संबंधित स्तर पर समीक्षा की जरूरत है।
