कांवड़ यात्रा बनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ताकत, सावन में 5 हजार करोड़ के
रायपुर। सावन माह में निकलने वाली कांवड़ यात्रा अब केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं रह गई है, बल्कि यह देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कुटीर उद्योगों के लिए भी बड़ा आर्थिक आधार बन चुकी है। कांवड़ यात्रा के दौरान पूजा सामग्री, वस्त्र, सजावटी सामान, खाद्य सामग्री और परिवहन सहित विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार तेजी से बढ़ता है। इस वर्ष कांवड़ यात्रा से करीब 5 हजार करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान जताया गया है।


कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय वाइस चेयरमैन अमर पारवानी ने बताया कि कांवड़ यात्रा का लाभ केवल बड़े व्यापारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे लाखों कारीगरों, हस्तशिल्प से जुड़े लोगों, छोटे व्यापारियों और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों को भी रोजगार मिलता है।
उन्होंने कहा कि कांवड़, भगवा वस्त्र, पूजा सामग्री, त्रिशूल, डमरू, झंडे, रुद्राक्ष, जलपात्र, धार्मिक सजावटी सामग्री, मिठाई, फल, भोजनालय, परिवहन और अस्थायी दुकानों का कारोबार सावन के दौरान कई गुना बढ़ जाता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योगों को भी नई गति मिलती है।
अमर पारवानी के अनुसार, कांवड़ यात्रा धार्मिक परंपरा के साथ-साथ स्थानीय बाजारों और लघु उद्योगों के लिए भी आर्थिक अवसर लेकर आती है। देशभर में लाखों श्रद्धालुओं की भागीदारी से छोटे व्यापारियों की आय बढ़ती है और हजारों परिवारों की आजीविका को सहारा मिलता है।
उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों से जुड़े इस प्रकार के मौसमी कारोबार भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को भी बढ़ावा देते हैं।
