CGPSC परीक्षा पर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के सवाल, 187 अभ्यर्थियों
कोरबा । छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की परीक्षा में पारदर्शिता और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने साक्षात्कार के लिए अभ्यर्थियों के चयन के अनुपात और मुख्य परीक्षा के परिणाम को लेकर आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

पूर्व मंत्री ने कहा कि राज्य सेवा परीक्षा में 265 पदों पर भर्ती होनी है। नियम के अनुसार एक पद के लिए तीन अभ्यर्थियों के अनुपात में कुल 795 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाना था, लेकिन आयोग ने केवल 608 अभ्यर्थियों को ही पात्र माना। इस तरह 187 अभ्यर्थी साक्षात्कार की प्रक्रिया से बाहर हो गए।
187 अभ्यर्थियों के अंक सार्वजनिक करने की मांग
जयसिंह अग्रवाल ने सवाल उठाया कि यदि 187 अभ्यर्थी निर्धारित न्यूनतम अर्हकारी अंक हासिल नहीं कर सके, तो उनके प्राप्तांक सार्वजनिक किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि अभ्यर्थियों को किस आधार पर साक्षात्कार की प्रक्रिया से बाहर किया गया है।
उन्होंने आयोग की चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को उनके प्रदर्शन और परिणाम की स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। उनके अनुसार, साक्षात्कार के लिए निर्धारित संख्या से कम अभ्यर्थियों के चयन का आधार सार्वजनिक होना जरूरी है।
मूल्यांकन प्रक्रिया पर भी सवाल
पूर्व मंत्री ने मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि कुछ मामलों में समान उत्तर लिखे जाने के बावजूद अभ्यर्थियों को अलग-अलग अंक दिए गए। उनका आरोप है कि एक जैसे उत्तर पर किसी अभ्यर्थी को दो अंक मिले, जबकि दूसरे को शून्य अंक दिया गया।
उन्होंने आयोग से मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट करने और अभ्यर्थियों की आपत्तियों का निराकरण करने की मांग की है। साथ ही परीक्षा की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की बात कही।
आयोग के स्पष्टीकरण पर भी उठाए सवाल
CGPSC की ओर से साक्षात्कार के लिए 608 अभ्यर्थियों के पात्र होने के संबंध में न्यूनतम अर्हकारी अंक का प्रावधान बताया गया है। आयोग के अनुसार, मुख्य परीक्षा के प्रत्येक प्रश्नपत्र में निर्धारित न्यूनतम अंक हासिल करना अनिवार्य है। इसी आधार पर निर्धारित संख्या से कम अभ्यर्थी साक्षात्कार के लिए पात्र हुए।
हालांकि, पूर्व मंत्री का कहना है कि यदि यही वजह है तो आयोग को संबंधित अभ्यर्थियों के अंक सार्वजनिक करने चाहिए, ताकि पूरी स्थिति स्पष्ट हो सके। उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब देने की मांग की है।
