भोरमदेव मंदिर में VIP दर्शन खत्म करने की मांग, श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर
कवर्धा। । श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान के दरबार में सभी भक्तों के लिए समान दर्शन व्यवस्था होनी चाहिए। आम श्रद्धालुओं की लंबी कतार के बीच विशेष लोगों को अलग रास्ते या प्राथमिकता से दर्शन कराने की व्यवस्था भीड़ प्रबंधन को प्रभावित कर सकती है।
सोमवार को मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के बाद सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठे। श्रद्धालुओं का कहना है कि जब हजारों लोग कतार में खड़े हों, उस दौरान किसी भी तरह की विशेष प्रवेश व्यवस्था से असंतोष के साथ धक्का-मुक्की जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे में सभी श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थित और समान दर्शन व्यवस्था लागू करना जरूरी है।


करीब एक हजार वर्ष पुराना है मंदिर
भगवान शिव को समर्पित भोरमदेव मंदिर करीब एक हजार वर्ष पुराना ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है। सावन के सोमवार को यहां छत्तीसगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक और दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से पार्किंग, यातायात, बैरिकेडिंग और श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित करने के इंतजाम किए जाते हैं।
श्रद्धालुओं की मांग है कि मंदिर में प्रवेश और निकासी के लिए अलग-अलग मार्ग निर्धारित किए जाएं। इसके साथ ही कतार व्यवस्था को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त बैरिकेडिंग, सीसीटीवी निगरानी और पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की जाए।
भगदड़ की घटनाओं से सबक लेने की जरूरत
देश के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर भीड़ के दबाव और अफवाहों के कारण सामने आई घटनाओं को देखते हुए भोरमदेव मंदिर में भी पहले से पुख्ता सुरक्षा इंतजाम करने की जरूरत बताई जा रही है। 17 अगस्त को बिहार के लखीसराय स्थित अशोक धाम मंदिर में भगदड़ जैसी स्थिति में सात श्रद्धालुओं की मौत की घटना के बाद मंदिरों में भीड़ प्रबंधन को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि ऐसी घटनाओं से सबक लेते हुए भोरमदेव में आपातकालीन निकासी मार्ग, सीसीटीवी निगरानी, मजबूत बैरिकेडिंग और पर्याप्त सुरक्षा बल की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। भीड़ बढ़ने की स्थिति में तत्काल नियंत्रण के लिए प्रशासन को स्पष्ट योजना भी तैयार रखनी चाहिए।
‘भगवान के दरबार में सभी भक्त समान’
श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान के दरबार में सभी भक्त समान हैं। इसलिए किसी व्यक्ति को विशेष सुविधा देने के बजाय ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिसमें बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम दर्शन मिल सके। लोगों ने प्रशासन से वीआईपी दर्शन व्यवस्था समाप्त कर सभी भक्तों के लिए समान दर्शन व्यवस्था लागू करने की अपील की है।

