AI गणेश प्रतिमाओं का ट्रेंड पड़ा फीका, इस बार शास्त्रसम्मत मूर्तियों की बढ़ी
रायपुर। गणेशोत्सव की तैयारियों के बीच इस वर्ष छत्तीसगढ़ में श्रद्धालुओं की पसंद में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पिछले कुछ वर्षों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार सुपरहीरो शैली, काल्पनिक रूप और अलग-अलग आधुनिक स्वरूप वाली गणेश प्रतिमाओं का चलन तेजी से बढ़ा था, लेकिन इस बार श्रद्धालु इन प्रतिमाओं से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं। अब अधिकांश लोग पौराणिक ग्रंथों और शास्त्रों के अनुरूप भगवान श्रीगणेश की पारंपरिक प्रतिमाओं को ही प्राथमिकता दे रहे हैं।

धार्मिक संस्थाओं, संतों और पंडितों द्वारा भगवान गणेश के पारंपरिक स्वरूप को अपनाने की अपील का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। श्रद्धालुओं का मानना है कि गणेशोत्सव धार्मिक आस्था और परंपरा का पर्व है, इसलिए प्रतिमाएं भी शास्त्रसम्मत और पारंपरिक स्वरूप में ही स्थापित की जानी चाहिए।
इस बदलाव की सबसे स्पष्ट तस्वीर दुर्ग जिले के प्रसिद्ध मूर्तिकार गांव थनौद में दिखाई दे रही है। यहां के मूर्तिकारों का कहना है कि इस वर्ष उन्हें जितने भी ऑर्डर मिले हैं, वे सभी 100 प्रतिशत पारंपरिक और शास्त्रसम्मत गणेश प्रतिमाओं के हैं। पिछले वर्षों की तुलना में AI आधारित या आधुनिक प्रयोगात्मक डिजाइनों की मांग लगभग समाप्त हो गई है।
मूर्तिकारों के अनुसार, श्रद्धालु अब भगवान गणेश की पारंपरिक मुद्रा, स्वरूप और शास्त्रीय विशेषताओं वाली प्रतिमाओं को अधिक पसंद कर रहे हैं। इससे स्थानीय कारीगरों की पारंपरिक कला को भी नया प्रोत्साहन मिला है।
धार्मिक जानकारों का मानना है कि यह बदलाव केवल प्रतिमाओं की पसंद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और शास्त्रसम्मत पूजा-पद्धति के प्रति लोगों की बढ़ती आस्था और जागरूकता का भी संकेत है। गणेशोत्सव के इस सीजन में पारंपरिक प्रतिमाओं की बढ़ती मांग ने स्थानीय मूर्तिकारों के चेहरे पर भी खुशी लौटा दी है।
