‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान से जल संरक्षण को मिल रही रफ्तार, 1,610 करोड़
रायपुर। प्रदेश में जल संरक्षण, रोजगार सृजन और आजीविका संवर्धन को एक साथ बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान के तहत बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है। 24 अप्रैल 2025 से शुरू हुए इस अभियान के माध्यम से गांवों में जल संरक्षण और जल संवर्धन की स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण किया जा रहा है।

अभियान के अंतर्गत करीब 1,610 करोड़ रुपये की लागत से एक लाख से अधिक जल संरक्षण एवं संवर्धन संबंधी स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण किया जा रहा है। इन कार्यों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ाने के साथ भूजल स्तर को बेहतर करने और जल स्रोतों के संरक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है।
महाअभियान का उद्देश्य केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करने और स्थानीय स्तर पर आजीविका के साधनों को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। जल संरक्षण से जुड़े कार्यों के जरिए ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने के साथ कृषि और अन्य आजीविका गतिविधियों को भी लाभ पहुंचने की उम्मीद है।
सरकार का मानना है कि गांवों में जल संरचनाओं के निर्माण और संरक्षण से भविष्य में जल संकट की चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी। साथ ही, बारिश के पानी का बेहतर उपयोग कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी यह अभियान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
