गांजा तस्करी पर तीन साल का मास्टर प्लान, 2029 तक पूरे नेटवर्क पर पुलिस
रायपुर। छत्तीसगढ़ में गांजा तस्करी के बढ़ते नेटवर्क पर लगाम लगाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने बड़ी तैयारी की है। राज्य में नशे के अवैध कारोबार को जड़ से खत्म करने के उद्देश्य से तीन वर्षीय कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके तहत अब पुलिस केवल गांजा पकड़ने और तस्करों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उत्पादन से लेकर परिवहन, सप्लाई और बिक्री तक पूरे नेटवर्क को निशाने पर लेगी।

पुलिस मुख्यालय की इस रणनीति को नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 के तहत आगे बढ़ाया जाएगा। इसका प्रमुख उद्देश्य ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से छत्तीसगढ़ के रास्ते होने वाली गांजा तस्करी पर प्रभावी रोक लगाना है। इन राज्यों से आने वाले नशे के अवैध कारोबार और उससे जुड़े संगठित नेटवर्क पर निगरानी बढ़ाई जाएगी।
तीन राज्यों से आने वाली तस्करी पर विशेष नजर
छत्तीसगढ़ की भौगोलिक स्थिति के कारण राज्य का इस्तेमाल दूसरे राज्यों से गांजा लाने और आगे पहुंचाने के लिए किए जाने की आशंका रहती है। ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से जुड़े तस्करी मार्गों को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने विशेष रणनीति तैयार की है। इसके तहत सीमावर्ती इलाकों, प्रमुख मार्गों और परिवहन के संदिग्ध नेटवर्क पर निगरानी मजबूत करने की योजना है।
पुलिस की कोशिश होगी कि तस्करी के रास्तों की पहचान कर उन पर लगातार कार्रवाई की जाए। इसके लिए संबंधित राज्यों की पुलिस और अन्य एजेंसियों के बीच समन्वय को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उत्पादन से बिक्री तक पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई
अब तक गांजा तस्करी के मामलों में अक्सर परिवहन के दौरान खेप पकड़ने और मौके पर मौजूद आरोपियों की गिरफ्तारी पर कार्रवाई केंद्रित रहती थी। लेकिन नई कार्ययोजना में तस्करी के पूरे आर्थिक और आपराधिक नेटवर्क को तोड़ने पर जोर दिया गया है।
इसके तहत गांजा उत्पादन, संग्रहण, परिवहन, आपूर्ति और बिक्री से जुड़े लोगों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी। तस्करी में इस्तेमाल होने वाले वाहनों, नेटवर्क के संचालकों और अवैध कारोबार से जुड़े अन्य सहयोगियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।
तीन साल तक चलेगा विशेष अभियान
नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 के जरिए अगले तीन वर्षों में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ व्यवस्थित अभियान चलाने की तैयारी है। इसका उद्देश्य केवल तस्करी की घटनाओं को रोकना नहीं, बल्कि इस कारोबार को संचालित करने वाले पूरे तंत्र को कमजोर करना है।
पुलिस की इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि छत्तीसगढ़ को गांजा तस्करी के ट्रांजिट रूट के रूप में इस्तेमाल करने वाले गिरोहों पर प्रभावी कार्रवाई हो सकेगी। यदि योजना के तहत सीमावर्ती निगरानी, अंतरराज्यीय समन्वय और नेटवर्क की आर्थिक जांच को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो नशे के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।

