संविदा क्षेत्र समन्वयकों को हाई कोर्ट से राहत, 45 वर्ष की आयु सीमा पर
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने संविदा क्षेत्र समन्वयकों को राहत देते हुए उनकी उम्मीदवारी पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है। अदालत ने 45 वर्ष की नई आयु सीमा के आधार पर संबंधित अभ्यर्थियों के मामलों पर 30 दिनों के भीतर विचार करने को कहा है। इस निर्देश से आयु सीमा के कारण प्रभावित हुए संविदा क्षेत्र समन्वयकों को राहत मिलने की उम्मीद है।

मामले में हाई कोर्ट के निर्देश के अनुसार, संबंधित प्राधिकारी को अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी पर निर्धारित समयसीमा के भीतर दोबारा विचार करना होगा। इसके लिए 45 वर्ष की नई आयु सीमा को आधार बनाया गया है। अदालत ने 30 दिनों के भीतर पुनर्विचार की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।
आयु सीमा के आधार पर उम्मीदवारी पर होगा विचार
संविदा पदों पर कार्य करने वाले अभ्यर्थियों के लिए निर्धारित आयु सीमा चयन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आयु संबंधी नियमों के कारण कई बार अभ्यर्थियों की पात्रता प्रभावित होती है। ऐसे में हाई कोर्ट का यह निर्देश संबंधित अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी पर नए सिरे से विचार करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अदालत के आदेश के बाद अब संबंधित विभाग या सक्षम प्राधिकारी को निर्धारित समयसीमा में मामले की समीक्षा करनी होगी। पुनर्विचार के दौरान 45 वर्ष की नई आयु सीमा को ध्यान में रखते हुए अभ्यर्थियों की पात्रता पर विचार किया जाएगा।
30 दिनों में प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश
हाई कोर्ट ने संबंधित प्राधिकारी को 30 दिनों के भीतर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है। इससे प्रभावित अभ्यर्थियों को अपनी उम्मीदवारी पर निर्णय के लिए निर्धारित समयसीमा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, पुनर्विचार के बाद प्रत्येक अभ्यर्थी की पात्रता और अंतिम निर्णय संबंधित नियमों तथा उपलब्ध तथ्यों के आधार पर तय होगा।
फिलहाल हाई कोर्ट का यह निर्देश संविदा क्षेत्र समन्वयकों की उम्मीदवारी से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण है। आदेश के विस्तृत तथ्यों और संबंधित विभाग की आगे की कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि इससे कितने अभ्यर्थियों को लाभ मिलेगा।
