अफसरों की सुस्ती से शहरों के विकास पर संकट, अनुदान की पात्रता खतरे में
रायपुर। छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों की लापरवाही अब शहरों के विकास पर भारी पड़ सकती है। सिटी फाइनेंस पोर्टल पर जरूरी जानकारी दर्ज नहीं करने के कारण प्रदेश के नगरीय निकाय 16वें वित्त आयोग से मिलने वाले अनुदान की पात्रता से वंचित हो सकते हैं। इस मामले में बार-बार निर्देश जारी किए जाने और प्रशिक्षण दिए जाने के बावजूद निकायों की प्रगति संतोषजनक नहीं है।
जानकारी के अनुसार, सिटी फाइनेंस पोर्टल पर आवश्यक जानकारियां अपलोड करने के लिए संबंधित नगरीय निकायों को अब तक चार बार पत्र जारी किए जा चुके हैं। इसके अलावा केंद्र और राज्य स्तर पर अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया गया, ताकि पोर्टल पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जानकारी दर्ज की जा सके। इसके बावजूद कई निकायों की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है।
16वें वित्त आयोग से मिलने वाला अनुदान नगरीय निकायों के विकास और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस राशि से शहरों में सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता और अन्य जरूरी नागरिक सुविधाओं के विकास में मदद मिलती है। ऐसे में पोर्टल पर जानकारी दर्ज करने में देरी निकायों के लिए आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि अधिकारियों को बार-बार निर्देश देने और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के बाद भी काम में तेजी नहीं आ रही है। यदि समय रहते जरूरी जानकारी पोर्टल पर दर्ज नहीं की गई, तो संबंधित निकायों को वित्त आयोग के अनुदान की पात्रता हासिल करने में परेशानी हो सकती है।
अब नगरीय प्रशासन विभाग के सामने निकायों से निर्धारित प्रक्रिया पूरी कराने की चुनौती है। सवाल यह है कि बार-बार निर्देशों के बावजूद लापरवाही बरतने वाले निकायों के जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी और क्या समय रहते सभी निकाय अनुदान की पात्रता से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी कर पाएंगे?

