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तीन दिन में तीन मादा हाथियों की मौत, वन अधिकरियों की उड़ी नींद

अंबिकापुर । सूरजपुर जिले के प्रतापपुर वन परिक्षेत्र में लगातर दो दिन के दो हाथियों की मौत का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ है। तीसरे दिन प्रतापपुर वन परिक्षेत्र से लगे राजपुर वन परिक्षेत्र के करवा जंगल में एक और हाथी मौत । इससे वन विभाग कटघरे में खड़ा नजर आ रहा है। इस हाथी के भी मादा होने की बात कही जा रही है। तीन दिन में तीन मादा हाथियों की मौत ने वन अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। अंबिकापुर से लेकर राजधानी रायपुर तक हड़कंप मचा हुआ है।

अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी अरुण पांडे की रेंज में मौजूदगी के दौरान तीसरे हाथी का शव मिलने के बाद अब मानव हाथी द्वंद की संभावना बढ़ गई है। लगातार हो रही मौतों को लेकर संदेह जताया जा रहा है कि या तो हाथी किसी संक्रमण का शिकार हुए हैं या फिर जिस बांध या तालाब का पानी हाथी सेवन कर रहे हैं उसमें गांव वालों द्वारा सुनियोजित तरीके से कीटनाशक मिला दिया गया है।

गुरुवार को जिस हाथी का शव मिला है वह भी प्यारे दल का ही सदस्य बताया जा रहा है। इसी दल के दो हाथी प्रतापपुर वन परिक्षेत्र में मारे गए हैं। सरगुजा वन वृत्त में सर्वाधिक आक्रामक प्यारे हाथी को माना जाता है। इस हाथी के दल में लगभग 18 सदस्य है। हाथियों का यह दल सूरजपुर और बलरामपुर जिले के सीमावर्ती प्रतापपुर और राजपुर वन परिक्षेत्र में ही विचरण करता है।

यह इलाका गन्ना उत्पादक होने के साथ ही सब्जी वर्गीय फसलों की खेती के लिए भी प्रसिद्ध है। साल के लगभग 8 से 9 महीने हाथियों का यह दल इसी इलाके में भ्रमण कर इंसानों की जान लेने के साथ ही मकानों को क्षतिग्रस्त करने और फसलों को नुकसान पहुंचाने में लगा रहता है।

हाथियों द्वारा लगातार जान माल का नुकसान पहुंचाए जाने के कारण गांव वाले भी त्रस्त हो चुके हैं। इस दल के किसी भी हाथी में सेटेलाइट कॉलर आईडी भी नहीं है जिस कारण हाथियों के लोकेशन का भी पता नहीं चलता। गुरुवार सुबह जिस स्थान पर हाथी का शव मिला, उसकी दूरी प्रतापपुर वन परिक्षेत्र से ज्यादा नहीं है।

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