रायपुर में जर्जर भवनों पर अब निगम की सख्ती, 150 इमारतें रडार पर
रायपुर। राजधानी में जर्जर और खतरनाक भवनों को लेकर नगर निगम प्रशासन ने अब सख्त रुख अपनाया है। शहर में करीब 150 जर्जर भवनों की सूची पहले से तैयार है, लेकिन अब तक ज्यादातर मामलों में कार्रवाई नोटिस जारी करने तक ही सीमित रही है। बारिश के मौसम और त्योहारों के दौरान भवन मालिकों को नोटिस देकर औपचारिकता पूरी करने की प्रक्रिया चलती रही है।

हालांकि, दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 6 सितंबर को पीजी हॉस्टल की इमारत ढहने की घटना के बाद नगर निगम प्रशासन ने राजधानी के जर्जर भवनों को लेकर गंभीरता बढ़ा दी है। निगम अधिकारियों को ऐसे भवनों की दोबारा जांच कर खतरे की स्थिति के आधार पर कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
हादसे से पहले कार्रवाई की तैयारी
नगर निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन भवनों से निपटना है, जो लंबे समय से जर्जर स्थिति में हैं और जिनमें रहना या उनका इस्तेमाल करना लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। अब ऐसे भवनों की स्थिति का दोबारा आकलन कर आवश्यक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
सिर्फ नोटिस नहीं, आगे की कार्रवाई पर जोर
अब निगम प्रशासन का जोर केवल नोटिस जारी करने तक सीमित रहने के बजाय जर्जर भवनों के संबंध में आगे की कार्रवाई करने पर है। भवन मालिकों को सुरक्षा संबंधी निर्देश देने के साथ जरूरत पड़ने पर खतरनाक हिस्सों को हटाने या अन्य नियमानुसार कार्रवाई करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
राजधानी में मानसून और त्योहारों के दौरान जर्जर भवनों से हादसे का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में दिल्ली की घटना के बाद रायपुर में भी निगम प्रशासन की सक्रियता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब देखना होगा कि सूची में शामिल करीब 150 भवनों पर निगम की कार्रवाई कितनी तेजी से जमीन पर नजर आती है।
