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सीबीआई जांच पर फिर उठे सवाल

रायपुर – राज्य गठन के बाद छत्तीसगढ़ में कई चर्चित आपराधिक और भ्रष्टाचार के मामलों की जांच Central Bureau of Investigation (सीबीआई) को सौंपी गई, लेकिन अधिकांश मामलों में अब तक अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आ सका है। झीरम कांड, महादेव बेटिंग ऐप, नान घोटाला समेत कई हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच वर्षों से जारी है। कहीं चार्जशीट लंबित है तो कहीं सुनवाई की प्रक्रिया धीमी गति से आगे बढ़ रही है।

हाल ही में कोरिया जिले के बहुचर्चित तिहरे हत्याकांड की जांच भी सीबीआई को सौंपे जाने के बाद एक बार फिर केंद्रीय एजेंसी की कार्यप्रणाली और उसकी जांच के परिणामों को लेकर बहस तेज हो गई है। लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जिन मामलों को निष्पक्ष और प्रभावी जांच की उम्मीद में सीबीआई को सौंपा जाता है, उनमें अंतिम निष्कर्ष आने में इतना लंबा समय क्यों लग रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि हाई-प्रोफाइल मामलों में तकनीकी साक्ष्य, बड़ी संख्या में गवाह, विभिन्न राज्यों से जुड़े पहलू और कानूनी प्रक्रियाएं जांच को जटिल बना देती हैं। वहीं, आमजन की अपेक्षा रहती है कि संवेदनशील मामलों में समयबद्ध जांच और शीघ्र न्याय सुनिश्चित हो।

कोरिया तिहरे हत्याकांड के बाद एक बार फिर यह चर्चा केंद्र में है कि क्या सीबीआई जांच से मामलों का जल्द और प्रभावी निपटारा हो पाएगा या यह मामला भी लंबी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बन जाएगा। ऐसे में सभी की निगाहें अब केंद्रीय एजेंसी की जांच और आगे की न्यायिक कार्रवाई पर टिकी हैं।

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