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‘एलीफेंट रेस्टोरेंट’ से संवर रहा जंगल, हाथियों के गोबर से उग रहे नए वन

गरियाबंद। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व ने वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के संवर्धन के लिए एक अनोखी पहल शुरू की है। ‘एलीफेंट रेस्टोरेंट’ नामक इस अभिनव मॉडल के तहत हाथियों के गोबर में अंकुरित होने वाले बीजों को एकत्र कर जंगलों में रोपा जा रहा है। इस पहल से प्राकृतिक रूप से वनों के पुनर्जीवन को बढ़ावा मिल रहा है।

Chattisgarh Elephant Restaurant: हाथियों की लीद में बीजों को जीवन देकर उगा रहे जंगल, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की अनोखी पहल

वन विभाग के अनुसार, हाथी जंगलों में विभिन्न प्रकार के फल और वनस्पतियां खाते हैं। उनके गोबर के साथ निकलने वाले कई बीज अंकुरित होने की क्षमता रखते हैं। इन्हें एकत्र कर उपयुक्त स्थानों पर रोपित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय प्रजातियों के पौधों का प्राकृतिक विस्तार हो रहा है और जंगल की जैव विविधता को मजबूती मिल रही है।

इसके साथ ही टाइगर रिजर्व में हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित ट्रैकिंग प्रणाली का भी उपयोग किया जा रहा है। इस तकनीक के माध्यम से हाथियों के मूवमेंट की निगरानी कर समय रहते ग्रामीणों और वन अमले को सूचना दी जाती है। इससे मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं में कमी आई है और वन्यजीवों के संरक्षण को नई दिशा मिली है।

वन विभाग का मानना है कि ‘एलीफेंट रेस्टोरेंट’ और एआई आधारित निगरानी प्रणाली का यह मॉडल वन संरक्षण, जैव विविधता के पुनर्जीवन तथा मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व की दिशा में प्रभावी साबित हो रहा है। भविष्य में इस मॉडल को अन्य संरक्षित क्षेत्रों में भी लागू करने की संभावना पर विचार किया जा रहा है।

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