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जिमीकंद बना महिलाओं की कमाई का जरिया, 427 गांवों में हर साल 4 करोड़ की आय राजनांदगांव।

राजनांदगांव जिले में स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने जिमीकंद की खेती को व्यावसायिक रूप देकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। पद्मश्री फुलबासन यादव के मार्गदर्शन में वर्ष 2014 से शुरू हुई इस पहल से आज जिले के 427 गांवों की हजारों महिलाएं जुड़ चुकी हैं।

जिमीकंद उत्पादन और विपणन के माध्यम से महिलाएं सामूहिक रूप से हर वर्ष करीब 4 करोड़ रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। यह मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ महिला सशक्तीकरण का भी प्रभावी उदाहरण बनकर उभरा है।

इस अभियान का उद्देश्य प्रत्येक गांव को हर दो वर्ष में जिमीकंद उत्पादन के माध्यम से 60 हजार रुपये तक की अतिरिक्त आय उपलब्ध कराना है। स्थानीय स्तर पर बढ़ती भागीदारी और बेहतर बाजार व्यवस्था के कारण यह पहल लगातार विस्तार कर रही है।

ग्रामीण महिलाओं की मेहनत और सामूहिक प्रयास से जिमीकंद अब सिर्फ एक फसल नहीं, बल्कि आर्थिक सशक्तीकरण का मजबूत माध्यम बन गया है। यह मॉडल अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणादायक साबित हो रहा है।

राजनांदगांव में पद्मश्री फुलबासन ने जमीन के नीचे से ढूंढ निकाले चार करोड़,  427 गांवों की 9936 महिलाओं की जिमीकंद ने बदली तकदीर

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