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छत्तीसगढ़ में अवैध प्रवासियों पर शिकंजे की तैयारी, 15 नवंबर से सघन जांच

रायपुर। छत्तीसगढ़ में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान और उनके दस्तावेजों की जांच के लिए प्रदेशव्यापी सघन अभियान चलाया जाएगा। उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा के अनुसार, 15 नवंबर से 15 जनवरी तक दो महीने तक विशेष जांच अभियान चलाने की तैयारी है। अभियान के दौरान संदिग्ध व्यक्तियों की नागरिकता और निवास की वैधता की जांच की जाएगी। साथ ही अवैध रूप से रह रहे लोगों को शरण देने वाले ठेकेदारों, नियोक्ताओं और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

इस अभियान के तहत गांवों में ग्राम सभाओं और शहरों में पार्षदों के सहयोग से संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान करने की व्यवस्था बनाई जाएगी। किराएदारों का सत्यापन अनिवार्य करने, फेरी लगाकर कारोबार करने वालों के पंजीयन और अवैध प्रवासियों से संबंधित जानकारी जुटाने के लिए विशेष सॉफ्टवेयर तैयार करने की योजना भी है। फर्जी पाए जाने वाले आधार कार्ड को निष्क्रिय कराने के लिए संबंधित प्राधिकरणों के माध्यम से कार्रवाई की जाएगी।

नागरिकता और निवास की वैधता की होगी जांच

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि किसी व्यक्ति का लंबे समय तक भारत में रहना अपने आप में भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं है। आधार कार्ड, पैन कार्ड और राशन कार्ड जैसे दस्तावेज पहचान या अन्य निर्धारित उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाते हैं, लेकिन ये अपने आप में भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं हैं।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि संदिग्ध व्यक्तियों की नागरिकता और निवास की वैधता का निर्धारण केंद्रीय गृह मंत्रालय की मानक प्रक्रिया और प्रचलित कानूनों के अनुसार किया जाए। बांग्लादेश से आए लोगों के संबंध में विस्तृत जानकारी एकत्र करने और उनका रिकॉर्ड तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

शरण देने वालों और फर्जी दस्तावेज बनाने वालों पर कार्रवाई

प्रस्तावित अभियान में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान के साथ उन लोगों की भूमिका की भी जांच की जाएगी, जो उन्हें जानबूझकर शरण देने या फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराने में शामिल पाए जाते हैं। ठेकेदारों और नियोक्ताओं की भूमिका की जांच कर नियमों का उल्लंघन सामने आने पर संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन का उद्देश्य संदिग्ध मामलों में उपलब्ध दस्तावेजों का सत्यापन करना और यह पता लगाना होगा कि संबंधित व्यक्ति किस आधार पर प्रदेश में रह रहा है। जांच के दौरान तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

गांवों और शहरों में स्थानीय निकायों की मदद

अभियान को प्रभावी बनाने के लिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने की योजना है। गांवों में ग्राम सभाओं और शहरों में पार्षदों के सहयोग से संदिग्ध व्यक्तियों के संबंध में जानकारी एकत्र की जाएगी। इसके साथ ही किराएदारों के सत्यापन और फेरी लगाकर कारोबार करने वालों के पंजीयन की व्यवस्था पर जोर दिया जाएगा।

औद्योगिक क्षेत्रों और निर्माण स्थलों पर भी विशेष जांच की जाएगी। इन स्थानों पर काम करने वाले श्रमिकों और अन्य कामगारों के पहचान तथा निवास से जुड़े दस्तावेजों का निर्धारित नियमों के अनुसार सत्यापन किया जाएगा। इस प्रक्रिया में संबंधित विभागों और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय महत्वपूर्ण रहेगा।

विशेष सॉफ्टवेयर से तैयार होगा रिकॉर्ड

अवैध प्रवासियों से संबंधित जानकारी को व्यवस्थित करने के लिए विशेष सॉफ्टवेयर तैयार करने की योजना है। इसके माध्यम से उपलब्ध सूचनाओं का संकलन और सत्यापन करने में सहायता मिल सकती है। फर्जी पाए जाने वाले आधार कार्ड को निष्क्रिय कराने के लिए संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि भारत को धर्मशाला नहीं बनने देना है। उन्होंने अधिकारियों से नागरिकता और निवास से जुड़े मामलों में निर्धारित मानक प्रक्रिया का पालन करते हुए कार्रवाई करने को कहा।

15 नवंबर से 15 जनवरी तक प्रस्तावित अभियान

प्रदेश में प्रस्तावित दो माह का यह अभियान संदिग्ध मामलों की पहचान, दस्तावेजों के सत्यापन और अवैध गतिविधियों में सहयोग करने वालों की भूमिका की जांच पर केंद्रित रहेगा। अभियान की विस्तृत कार्ययोजना, विभागवार जिम्मेदारियों और सॉफ्टवेयर की व्यवस्था से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद इसकी प्रक्रिया और स्पष्ट होगी।

फिलहाल घोषित कार्यक्रम के अनुसार, 15 नवंबर से 15 जनवरी तक प्रदेशभर में सघन जांच अभियान चलाने की तैयारी है। जांच के दौरान संबंधित व्यक्तियों की नागरिकता और निवास की स्थिति का निर्धारण प्रचलित कानूनों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप किया जाना प्रस्तावित है।

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