डीए-डीआर में एरियर गायब, पेंशनर्स का फूटा गुस्सा; बड़े आंदोलन की तैयारी
रायपुर। छत्तीसगढ़ में शासकीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को महंगाई भत्ता (डीए) एवं महंगाई राहत (डीआर) देने के आदेश में एरियर का लाभ शामिल नहीं किए जाने को लेकर नाराजगी बढ़ने लगी है। पेंशनर्स नेता वीरेंद्र नामदेव ने शासन के इस फैसले पर गहरी आपत्ति जताते हुए इसे कर्मचारियों और पेंशनर्स के जले पर नमक छिड़कने जैसा बताया है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से महंगाई भत्ते और महंगाई राहत के एरियर की मांग कर रहे कर्मचारियों एवं पेंशनर्स को एक बार फिर निराशा हाथ लगी है। शासन के आदेश से उनकी आर्थिक उम्मीदों को झटका लगा है।

वीरेंद्र नामदेव ने कहा कि महंगाई लगातार बढ़ रही है। खाद्य सामग्री, दवाइयों, बिजली, परिवहन और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे समय में महंगाई भत्ता और महंगाई राहत कर्मचारियों तथा पेंशनर्स के लिए केवल अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि बढ़ती महंगाई से मुकाबला करने का एक महत्वपूर्ण आर्थिक सहारा है। इसके बावजूद एरियर का भुगतान नहीं किया जाना समझ से परे है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कर्मचारियों और पेंशनर्स को महंगाई के अनुरूप डीए और डीआर का लाभ दिया जा रहा है, तो उन्हें बकाया राशि से वंचित क्यों रखा जा रहा है?
उन्होंने कहा कि प्रदेश के लाखों कर्मचारी और पेंशनर्स लंबे समय से केंद्र सरकार के समान महंगाई भत्ता एवं महंगाई राहत देने की मांग कर रहे हैं। केंद्र और राज्य के महंगाई भत्ते में अंतर होने के कारण कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। वहीं, पेंशनर्स के लिए महंगाई राहत उनकी मासिक पेंशन का अहम हिस्सा होती है। ऐसे में डीए-डीआर के एरियर का भुगतान नहीं करना उनके साथ अन्याय है। खासकर सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए यह राशि काफी मायने रखती है, क्योंकि उम्र के इस पड़ाव में चिकित्सा और घरेलू खर्च लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
नामदेव ने कहा कि कर्मचारियों और पेंशनर्स ने अपनी मांगों को लेकर कई बार शासन का ध्यान आकर्षित कराया है। ज्ञापन, आवेदन और विभिन्न माध्यमों से अपनी समस्याएं सरकार तक पहुंचाई गई हैं, लेकिन मांगों पर संतोषजनक निर्णय नहीं लिया गया। अब बिना एरियर के डीए-डीआर आदेश जारी होने से कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच असंतोष और गहरा गया है। उन्होंने इसे कर्मचारियों की भावनाओं की अनदेखी बताते हुए कहा कि केवल आदेश जारी कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कर्मचारियों को उनके वास्तविक आर्थिक अधिकारों का लाभ भी मिलना चाहिए।
दीपावली बाद आंदोलन की तैयारी
पेंशनर्स नेता ने शासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि डीए-डीआर के एरियर भुगतान और अन्य लंबित मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो दीपावली के बाद प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। इस आंदोलन में कर्मचारी और पेंशनर्स संगठनों को एकजुट करने की तैयारी की जाएगी। उन्होंने कहा कि आंदोलन को प्रदेशव्यापी स्वरूप दिया जाएगा, ताकि सरकार तक कर्मचारियों और पेंशनर्स की आवाज मजबूती से पहुंचाई जा सके।
उन्होंने प्रदेश के सभी कर्मचारी और पेंशनर्स संगठनों से भी अपील की कि वे अपने-अपने मतभेदों को दरकिनार कर साझा मांगों को लेकर एक मंच पर आएं। उनका कहना है कि जब तक संगठन एकजुट होकर अपनी मांगों के लिए आवाज नहीं उठाएंगे, तब तक सरकार का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर प्रभावी ढंग से आकर्षित करना मुश्किल होगा।
सरकार से पुनर्विचार की मांग
वीरेंद्र नामदेव ने राज्य सरकार से मांग की है कि डीए-डीआर के आदेश पर पुनर्विचार किया जाए और कर्मचारियों तथा पेंशनर्स को बकाया एरियर का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों ने अपने पूरे सेवाकाल में शासन की जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है। सेवानिवृत्ति के बाद पेंशनर्स को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए आर्थिक सुरक्षा मिलना जरूरी है। सरकार को उनकी मांगों को गंभीरता से लेते हुए जल्द निर्णय लेना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि मांगों की अनदेखी जारी रही तो दीपावली के बाद आंदोलन का रास्ता अपनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। फिलहाल डीए-डीआर के एरियर को लेकर कर्मचारी और पेंशनर्स संगठनों में नाराजगी का माहौल है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर आंदोलन तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
