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महादेव सट्टा कांड में बड़ा मोड़, सौरभ चंद्राकर CBI की गिरफ्त में

रायपुर। बहुचर्चित महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। ऐप का मुख्य प्रमोटर और मामले में आरोपी सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाया गया है। करीब 116 दिनों तक ओमान में हिरासत में रहने के बाद उसे भारतीय एजेंसियों के हवाले किया गया है। इस मामले में अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच तेज होने की संभावना है।

जानकारी के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया, जहां से CBI को दो दिन की ट्रांजिट रिमांड मिली है। अदालत ने उसे 4 नवंबर या उससे पहले रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद CBI उससे महादेव सट्टा ऐप के संचालन, आर्थिक लेन-देन और नेटवर्क से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर पूछताछ करेगी।

बताया जा रहा है कि सौरभ चंद्राकर को 8 जुलाई 2026 को ओमान की रॉयल पुलिस ने गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, फरार रहने के दौरान उसने कथित तौर पर फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट का इस्तेमाल किया था। इस पासपोर्ट में उसकी पहचान ‘अजंता मेंडिस’ के नाम से दर्ज बताई गई है। अब भारत वापसी के बाद उसकी पहचान, विदेश में रहने के दौरान की गतिविधियों और सट्टा कारोबार से जुड़े नेटवर्क की जांच की जाएगी।

2017 में शुरू किया था सट्टे का कारोबार

सौरभ चंद्राकर की पृष्ठभूमि भी इस मामले में चर्चा का विषय रही है। बताया जाता है कि वह भिलाई में जूस की दुकान चलाता था। वर्ष 2017 में उसने रवि उत्पल के साथ मिलकर ऑनलाइन सट्टे के कारोबार में कदम रखा। धीरे-धीरे महादेव ऐप का नेटवर्क फैलता गया और इस पर हजारों करोड़ रुपये के लेन-देन के आरोप सामने आए।

इस मामले में 30 मार्च 2022 को दुर्ग के मोहन नगर थाने में पहली एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ता गया और देश के विभिन्न हिस्सों में सट्टा नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल शुरू हुई।

3000 करोड़ से अधिक के सट्टा कारोबार की जांच

जांच से जुड़े इनपुट के मुताबिक, महादेव सट्टा ऐप से जुड़े मामले में 3000 करोड़ रुपये से अधिक के कथित सट्टा कारोबार की जांच की जा रही है। सौरभ चंद्राकर के खिलाफ अलग-अलग मामलों में 13 एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन किन लोगों के माध्यम से किया जाता था और इसके आर्थिक लेन-देन का दायरा कितना बड़ा था।

CBI के बाद ED भी ले सकती है रिमांड

सौरभ चंद्राकर से CBI की पूछताछ के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में उसकी रिमांड लेकर पूछताछ कर सकती है। एजेंसियों की जांच का मुख्य फोकस सट्टा कारोबार से अर्जित कथित अवैध कमाई, पैसों के लेन-देन, विदेशी कनेक्शन और नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका पर रहेगा।

इस पूछताछ के आधार पर छत्तीसगढ़ के कुछ अधिकारियों, नेताओं और अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। हालांकि, किसी व्यक्ति की संलिप्तता अभी जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी को महादेव सट्टा ऐप मामले की जांच में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अब CBI और ED की पूछताछ से इस पूरे नेटवर्क, कथित आर्थिक लेन-देन और इससे जुड़े अन्य लोगों के बारे में नए खुलासे होने की उम्मीद है।

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