लाल चंदन की खुशबू से बदली तकदीर: बस्तर की महिला किसान प्रभाती भारत
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर की महिला किसान प्रभाती भारत ने अपनी मेहनत, दूरदृष्टि और नवाचार से खेती की ऐसी मिसाल पेश की है, जो आज पूरे प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है। पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए उन्होंने लाल चंदन की व्यावसायिक खेती और जैविक कृषि को अपनाकर न केवल अपनी आय बढ़ाई, बल्कि टिकाऊ और लाभकारी खेती का सफल मॉडल भी तैयार किया है।

प्रभाती भारत ने अपने खेतों में रासायनिक उर्वरकों के बजाय पूरी तरह जैविक तरीकों को अपनाया। इसके साथ ही उन्होंने लाल चंदन जैसे बहुमूल्य और दीर्घकालिक लाभ देने वाले पौधों का रोपण कर खेती को नई दिशा दी। उनकी यह पहल आज आसपास के किसानों के लिए सीख का विषय बन चुकी है।
उनका मानना है कि यदि किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ दीर्घकालिक और उच्च मूल्य वाली फसलों को अपनाएं तथा जैविक खेती पर जोर दें, तो कम लागत में बेहतर आमदनी हासिल की जा सकती है। इसी सोच के साथ उन्होंने अपने खेत को प्रयोगशाला बनाया और आज उनकी सफलता दूर-दूर तक चर्चा का विषय है।
प्रभाती भारत की इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक सोच, नवाचार और मेहनत के दम पर खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है। उनकी सफलता से प्रेरित होकर बस्तर सहित प्रदेश के कई किसान अब लाल चंदन और जैविक खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
प्रभाती भारत का यह मॉडल आत्मनिर्भर खेती, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभरा है।
