FEATUREDLatestNewsUncategorizedछत्तीसगढ़रायपुर

2009 जमीन अधिग्रहण: पुरानी नीति लागू

बिलासपुर। जमीन अधिग्रहण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति की जमीन वर्ष 2009 में अधिग्रहित की गई है, तो उसके पुनर्वास और रोजगार से जुड़े दावे पर उसी समय लागू नीति के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। बाद में लागू की गई नीति का सहारा लेकर पुराने दावे को खारिज नहीं किया जा सकता।

मामले में एसईसीएल (South Eastern Coalfields Limited) की वर्ष 2012 की पुनर्वास नीति का हवाला देकर दावेदार का रोजगार संबंधी दावा खारिज किया गया था। न्यायालय ने इस प्रक्रिया को उचित नहीं माना और कहा कि अधिग्रहण के समय लागू पुनर्वास नीति के अनुसार ही दावे का परीक्षण किया जाना चाहिए।

2 एकड़ से कम जमीन वालों को भी नौकरी का हक

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर कि प्रभावित व्यक्ति के पास 2 एकड़ से कम जमीन थी, उसे रोजगार के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। अधिग्रहण के समय प्रभावी पुनर्वास नीति में यदि पात्रता का प्रावधान था, तो संबंधित व्यक्ति के दावे पर उसी आधार पर विचार करना होगा।

45 दिन में दावे पर निर्णय

न्यायालय ने संबंधित प्राधिकारी को दावेदार के मामले पर 45 दिनों के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि दावे का परीक्षण करते समय वर्ष 2009 में लागू नियमों और पुनर्वास नीति को आधार बनाया जाए।

बाद की नीति से पुराने अधिकार प्रभावित नहीं

इस फैसले से भूमि अधिग्रहण से प्रभावित लोगों के अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट हुई है। न्यायालय के रुख के मुताबिक, जिस समय जमीन का अधिग्रहण हुआ था, उसी समय लागू नीति के तहत उपलब्ध अधिकारों को बाद में बनाई गई नीति के आधार पर समाप्त नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में अधिग्रहण की तारीख और उस समय लागू पुनर्वास नीति महत्वपूर्ण आधार होंगे।

Admin

Reporter