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नक्सल ऑपरेशन में गंवाया पैर, अब एशियन पैरा गेम्स में तोमन कुमार ने जीता

बालोद। हौसले बुलंद हों तो मुश्किल से मुश्किल हालात भी मंजिल का रास्ता नहीं रोक सकते। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के निवासी पूर्व कोबरा कमांडो तोमन कुमार ने अपने जज्बे और मेहनत से यह साबित कर दिखाया है। नक्सल ऑपरेशन के दौरान आईईडी विस्फोट में अपना बायां पैर गंवाने वाले तोमन कुमार ने हार मानने के बजाय खेल की दुनिया में नई पहचान बनाई और अब एशियन पैरा गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया है।

तोमन कुमार और शीतल देवी की भारतीय जोड़ी ने कंपाउंड मिक्स्ड टीम स्पर्धा के फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए इंडोनेशिया की जोड़ी को 151-148 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। भारतीय जोड़ी की इस जीत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की ताकत और खिलाड़ियों के अदम्य साहस का परिचय दिया।

नक्सल ऑपरेशन में हुए थे गंभीर रूप से घायल

तोमन कुमार का सफर संघर्ष और साहस की मिसाल है। वर्ष 2021 में उन्होंने कोबरा कमांडो की ट्रेनिंग ली थी। देश की सुरक्षा के लिए अभियान के दौरान वह नक्सल ऑपरेशन में गंभीर रूप से घायल हो गए। इस दौरान आईईडी विस्फोट में उनका बायां पैर चला गया। यह हादसा किसी भी व्यक्ति के जीवन की दिशा बदल सकता था, लेकिन तोमन ने परिस्थितियों के आगे घुटने नहीं टेके।

शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने जीवन को नए सिरे से संवारने का फैसला किया। पुनर्वास यानी रिहैबिलिटेशन के दौरान उनका जुड़ाव पैरा तीरंदाजी से हुआ। धीरे-धीरे उन्होंने इस खेल में अपनी प्रतिभा निखारी और कड़ी मेहनत के दम पर राष्ट्रीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाई।

क्वालिफिकेशन राउंड में बनाया विश्व रिकॉर्ड

एशियन पैरा गेम्स में तोमन कुमार ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। क्वालिफिकेशन राउंड में उन्होंने 1402 अंक हासिल कर विश्व रिकॉर्ड बनाया। इसके बाद फाइनल में शीतल देवी के साथ उनकी जोड़ी ने बेहतरीन तालमेल और सटीक निशानेबाजी का प्रदर्शन करते हुए भारत को स्वर्ण पदक दिलाया।

संघर्ष से सफलता तक का प्रेरणादायक सफर

तोमन कुमार की उपलब्धि केवल एक पदक जीतने की कहानी नहीं है, बल्कि यह विपरीत परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा है। देश की सुरक्षा में अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्होंने खेल को अपनी नई पहचान बनाया। आज उनकी सफलता छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के युवाओं और खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन रही है।

बालोद के इस पूर्व कोबरा कमांडो ने साबित कर दिया कि हौसले के सामने शारीरिक सीमाएं भी छोटी पड़ जाती हैं। तोमन कुमार की यह उपलब्धि देश के लिए गौरव का क्षण है और उनके संघर्ष की कहानी आने वाली पीढ़ियों को मुश्किलों से लड़कर आगे बढ़ने का संदेश देती है।

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