सांगीतिक श्रद्धांजलि में याद की गईं पंडवानी की महान साधिका डॉ. तीजन बाई
रायपुर।- छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने वाली पंडवानी की महान साधिका, पद्म विभूषण स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई को बुधवार को रायपुर स्थित महंत घासीदास संग्रहालय परिसर के मुक्ताकाशी मंच पर आयोजित भव्य सांगीतिक श्रद्धांजलि समारोह में भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
लोककला, साहित्य और संस्कृति जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में स्व. तीजन बाई के जीवन, कला-साधना और छत्तीसगढ़ की लोकपरंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने में उनके अतुलनीय योगदान को स्मरण किया गया। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्भुत पंडवानी शैली से न केवल छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को देश-विदेश तक पहुंचाया, बल्कि नई पीढ़ी को लोककला से जोड़ने का भी महत्वपूर्ण कार्य किया।
श्रद्धांजलि समारोह में कलाकारों ने पंडवानी और अन्य लोकसंगीत की मनमोहक प्रस्तुतियों के माध्यम से स्व. तीजन बाई को नमन किया। पूरे आयोजन के दौरान उनकी स्मृतियों, कला-साधना और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के संकल्प को दोहराया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारों, लोक कलाकारों और संस्कृति प्रेमियों ने स्व. तीजन बाई के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को छत्तीसगढ़ की अमूल्य धरोहर बताते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
