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अनुसूचित जाति आयोग के अधिकार क्षेत्र पर हाई कोर्ट का अहम फैसला

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनुसूचित जाति आयोग के अधिकार क्षेत्र को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि आयोग किसी शिकायत की जांच कर सकता है और तथ्यों के आधार पर संबंधित सरकार या प्राधिकरण को कार्रवाई की सिफारिश कर सकता है। हालांकि, आयोग किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक अपराध सिद्ध होने का निष्कर्ष नहीं दे सकता।

कोर्ट ने कहा कि आयोग की भूमिका शिकायतों की जांच करने और मामले से जुड़े तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की अनुशंसा करने तक सीमित है। आपराधिक अपराध का निर्धारण करना सक्षम आपराधिक न्यायालय का अधिकार क्षेत्र है।

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हाई कोर्ट के इस फैसले को अनुसूचित जाति आयोग की शक्तियों और उसकी संवैधानिक भूमिका के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आयोग जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर संबंधित विभाग या सरकार को आवश्यक कार्रवाई के लिए अपनी अनुशंसा भेज सकता है, लेकिन वह न्यायालय की तरह किसी व्यक्ति को आपराधिक अपराध का दोषी घोषित नहीं कर सकता।

इस निर्णय से आयोग के समक्ष आने वाली शिकायतों में उसकी भूमिका और अधिकारों की सीमा को लेकर स्थिति स्पष्ट हुई है। कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक जिम्मेदारी तय करने के लिए कानून में निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।

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