थाने की चौखट पर बिखरता भरोसा: बेटी लापता, सिस्टम मौन
बिलासपुर। तखतपुर के ग्राम राजपुर में एक पिता की उम्मीदें हर दिन थाने की चौखट पर सिर पटक रही हैं… लेकिन व्यवस्था है कि मानो कानों में रूई डालकर बैठी है। 2 अप्रैल की शाम, शौच जाने का कहकर निकली 13 वर्षीय मासूम अब तक घर नहीं लौटी… और उसके पिता प्रमोद यादव के लिए हर दिन एक नया इम्तिहान बन गया है।
थाना परिसर में रोज एक ही दृश्य दोहराया जाता है—एक बाप, जिसकी आंखों में नींद नहीं, चेहरे पर थकान और दिल में बस एक ही सवाल—“मेरी बेटी कहाँ है?” लेकिन जवाब में मिलता है तो सिर्फ आश्वासन का घिसा-पिटा टेप—“तलाश जारी है…”
व्यवस्था की विडंबना देखिए… फाइलों में “गुम इंसान कायम” हो चुका है, वायरलेस पर सूचना भी दौड़ चुकी है, लेकिन जमीनी हकीकत में खोज जैसे ‘कागजों की सैर’ बनकर रह गई है। सवाल यह है कि क्या पुलिस की सक्रियता सिर्फ रजिस्टर तक सीमित है?
यह वही तंत्र है जो छोटी-छोटी बातों पर सख्ती का दम भरता है, लेकिन जब एक मासूम की जिंदगी दांव पर हो, तो संवेदनशीलता छुट्टी पर चली जाती है। क्या एक पिता की पुकार इतनी हल्की हो गई है कि वह सरकारी प्रक्रियाओं के नीचे दबकर रह जाए?
प्रमोद यादव अब पुलिस के दरवाजे पर सिर्फ फरियादी नहीं, बल्कि सिस्टम की निष्क्रियता का जीवंत प्रतीक बन चुके हैं। हर दिन उनका झुकता माथा पूछ रहा है—क्या इस व्यवस्था में एक बेटी की कीमत सिर्फ एक ‘केस नंबर’ भर है?
अब सवाल सिर्फ एक बच्ची के लापता होने का नहीं, बल्कि उस भरोसे का है जो धीरे-धीरे दम तोड़ रहा है… और अगर यही हाल रहा, तो आने वाले दिनों में लोग थाने नहीं, शायद किस्मत के आगे ही गुहार लगाना ज्यादा बेहतर

