खारुन नदी के सात एनीकट बने जानलेवा, पांच साल में 429 से ज्यादा लोगों की
रायपुर। राजधानी से होकर गुजरने वाली खारुन नदी के सात एनीकट लोगों के लिए लगातार जानलेवा साबित हो रहे हैं। बीते पांच वर्षों में सातपाखर, काठाडीह, मुजगहन, मुर्रा, मुंडरा, उरला और सोनडोंगरी एनीकट में डूबने की घटनाओं में 429 से अधिक लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है। इनमें करीब 80 प्रतिशत मामले शहरी क्षेत्र से जुड़े बताए जा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि गर्मी और बारिश के मौसम में इन एनीकटों के आसपास लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है। कई लोग नहाने, घूमने या पिकनिक मनाने के लिए नदी और एनीकट क्षेत्रों में पहुंचते हैं। इसी दौरान गहरे पानी, तेज बहाव और फिसलन के कारण हादसे हो जाते हैं।
खारुन नदी के इन एनीकटों पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या में डूबने की घटनाओं के बावजूद कई स्थानों पर लोगों को खतरे से बचाने के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने की बात सामने आ रही है। खासकर बारिश के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने पर खतरा और बढ़ जाता है।
शहरी इलाकों से बड़ी संख्या में लोगों के इन स्थानों तक पहुंचने के कारण प्रशासन के सामने चुनौती और गंभीर हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि संवेदनशील स्थानों पर चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाना चाहिए।
लगातार हो रही मौतों ने खारुन नदी के एनीकटों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जरूरत इस बात की है कि प्रशासन इन संवेदनशील स्थानों को चिन्हित कर हादसों की रोकथाम के लिए स्थायी सुरक्षा उपाय करे, ताकि नदी और एनीकट लोगों के लिए मौत का जाल न बनें।
