किसानों को यूरिया के लिए भटकना पड़ रहा, थोक में खाद बेचने के आरोप;
धमतरी। जिले में यूरिया खाद की उपलब्धता को लेकर स्थानीय किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है। किसानों का आरोप है कि उन्हें जरूरत के मुताबिक यूरिया खाद नहीं मिल पा रही है, जबकि कुछ कृषि केंद्रों से बिना जरूरी दस्तावेजों के थोक में खाद दूसरे क्षेत्रों के खरीदारों और कथित तस्करों को बेचने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

किसानों का कहना है कि फसल के महत्वपूर्ण समय में यूरिया के लिए उन्हें कृषि केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कई जगहों पर खाद की सीमित उपलब्धता के कारण किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर थोक में खाद की बिक्री की शिकायतों ने वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पॉश मशीन और नियमों पर सवाल
सरकार ने किसानों को निर्धारित मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए पॉश मशीन के जरिए बिक्री और दस्तावेजी प्रक्रिया लागू की है। किसानों का आरोप है कि जमीनी स्तर पर इन नियमों का पालन समान रूप से नहीं हो रहा है। उनका कहना है कि जहां वास्तविक किसान खाद के लिए परेशान हैं, वहीं कुछ जगहों पर बड़ी मात्रा में खाद की बिक्री कथित रूप से बिना पर्याप्त दस्तावेजों के की जा रही है।
ओडिशा और बस्तर तक पहुंचने की शिकायत
स्थानीय किसानों ने आरोप लगाया है कि धमतरी से यूरिया खाद का एक हिस्सा ओडिशा और बस्तर क्षेत्र के खरीदारों तक पहुंचाया जा रहा है। इससे स्थानीय किसानों के हिस्से की खाद की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
जांच और कार्रवाई की मांग
किसानों ने कृषि विभाग से खाद के स्टॉक, बिक्री रजिस्टर, पॉश मशीन में दर्ज लेनदेन और परिवहन की जांच कराने की मांग की है। साथ ही कृषि केंद्रों पर उपलब्ध स्टॉक और वास्तविक बिक्री का मिलान कर कालाबाजारी या अवैध परिवहन पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की मांग उठाई गई है।
किसानों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो यूरिया की कमी और कालाबाजारी का असर आगामी फसल पर पड़ सकता है।
