बुजुर्गों की उपेक्षा पड़ी भारी तो घर से बेदखल होंगे बच्चे: हाई कोर्ट
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण और नजीर बनने वाला फैसला सुनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि प्रत्येक बुजुर्ग को अपने घर में शांति, सम्मान और गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार है। यदि संतान या अन्य परिजन उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं या उनके शांतिपूर्ण जीवन में बाधा उत्पन्न करते हैं, तो उन्हें घर से बेदखल किया जा सकता है।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि ‘माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007’ का उद्देश्य बुजुर्गों को सुरक्षित, सम्मानजनक और भयमुक्त जीवन उपलब्ध कराना है। ऐसे मामलों में सक्षम प्राधिकारी और जिला प्रशासन को कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई संतान अपने माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार करती है, उनकी संपत्ति पर अवैध कब्जा करने का प्रयास करती है या उन्हें मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रताड़ित करती है, तो संबंधित प्राधिकारी उसे घर खाली कराने का आदेश दे सकते हैं। अदालत ने कहा कि कानून का उद्देश्य केवल भरण-पोषण सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और सुरक्षित जीवन की रक्षा करना भी है।
हाई कोर्ट की इस टिप्पणी को वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की दिशा में अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि यह फैसला उन बुजुर्गों के लिए राहत साबित होगा, जो अपनी ही संतान द्वारा प्रताड़ना या उपेक्षा का सामना कर रहे हैं।
