बहुमत कानून से ऊपर नहीं, लोकतंत्र में प्रक्रिया सर्वोपरि: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने स्थानीय स्वशासन और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है| कि लोकतंत्र में बहुमत का अधिकार भी कानून और निर्धारित प्रक्रियाओं से ऊपर नहीं हो सकता। न्यायालय ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती केवल बहुमत से नहीं, बल्कि संविधान और कानून के अनुरूप अपनाई गई वैधानिक प्रक्रिया से सुनिश्चित होती है।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी निर्वाचित संस्था में बहुमत होना महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक आवश्यक यह है कि प्रत्येक निर्णय विधि द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए लिया जाए। यदि कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी की जाती है, तो केवल बहुमत के आधार पर लिया गया निर्णय भी न्यायिक समीक्षा के दायरे में आएगा।
अदालत ने स्पष्ट किया कि स्थानीय स्वशासन संस्थाएं लोकतंत्र की आधारशिला हैं और उनके संचालन में पारदर्शिता, जवाबदेही तथा विधि के शासन का पालन अनिवार्य है। लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए प्रत्येक निर्णय संविधान और संबंधित कानूनों के अनुरूप होना चाहिए।
कानूनी जानकारों का मानना है कि हाई कोर्ट का यह फैसला स्थानीय निकायों की कार्यप्रणाली, अधिकारों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण मिसाल साबित होगा। इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि लोकतंत्र में बहुमत महत्वपूर्ण है, लेकिन कानून और वैधानिक प्रक्रिया सर्वोपरि हैं।

