शासकीयकरण पर फैसला नहीं तो आंदोलन तय! 11 हजार पंचायत सचिवों ने
रायपुर। छत्तीसगढ़ में ग्राम पंचायत सचिवों की लंबे समय से लंबित शासकीयकरण की मांग एक बार फिर जोर पकड़ती नजर आ रही है। शासकीयकरण को लेकर गठित समिति की रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आने से प्रदेशभर के करीब 11 हजार पंचायत सचिवों में असंतोष बढ़ रहा है। सचिव संगठन अब शासन के अगले कदम का इंतजार कर रहा है और जल्द ठोस निर्णय नहीं होने पर आंदोलन की रणनीति बनाने की तैयारी में है।
समिति की रिपोर्ट का इंतजार
पंचायत सचिवों के शासकीयकरण के मुद्दे पर गठित समिति की रिपोर्ट को लेकर सचिवों की नजरें टिकी हुई हैं। उनका कहना है कि लंबे संघर्ष के बाद समिति बनने से उम्मीद जगी थी कि उनकी मांग पर शासन सकारात्मक निर्णय लेगा, लेकिन रिपोर्ट सामने नहीं आने से कर्मचारियों में निराशा बढ़ रही है।
सचिवों के बीच अब सवाल उठ रहा है कि समिति की रिपोर्ट कब आएगी और शासकीयकरण को लेकर शासन का अंतिम फैसला कब होगा?
चरणबद्ध आंदोलन पर मंथन
शासन स्तर पर जल्द निर्णय नहीं होने की स्थिति में पंचायत सचिव चरणबद्ध और प्रभावी आंदोलन की राह पकड़ सकते हैं। प्रदेशभर में संगठन के स्तर पर बैठकों और आपसी विचार-विमर्श का दौर शुरू होने की संभावना है। सचिवों का कहना है कि वर्षों पुरानी मांग को अब केवल आश्वासन के बजाय स्पष्ट समयसीमा और ठोस निर्णय की जरूरत है।
नवंबर-दिसंबर में संगठन चुनाव
इधर प्रदेश पंचायत सचिव संगठन के वर्तमान कार्यकाल के नवंबर-दिसंबर में समाप्त होने की स्थिति को देखते हुए संगठन चुनाव की गतिविधियां भी तेज होने लगी हैं। चुनाव में शासकीयकरण के साथ-साथ सचिवों की सेवा-सुरक्षा और अन्य लंबित मांगें प्रमुख मुद्दा बन सकती हैं।
इस बार चुनाव केवल पदाधिकारियों के चयन तक सीमित रहने के बजाय संगठन की आगामी संघर्ष नीति और नेतृत्व की क्षमता पर भी केंद्रित रहने के संकेत हैं।
तीन साल के कामकाज का होगा हिसाब
आगामी संगठन चुनाव में मौजूदा नेतृत्व के करीब तीन वर्षों के कार्यकाल का मूल्यांकन भी महत्वपूर्ण रहने की संभावना है। सचिवों के बीच इस बात को लेकर चर्चा है कि शासकीयकरण जैसी प्रमुख मांग पर अपेक्षित उपलब्धि हासिल नहीं हो सकी।
ऐसे में चुनाव में ‘संघर्ष बनाम उपलब्धि’ और ‘वादे बनाम परिणाम’ जैसे मुद्दे प्रभावी हो सकते हैं।
नए नेतृत्व से निर्णायक पहल की उम्मीद
पंचायत सचिव अब ऐसे नेतृत्व की उम्मीद कर रहे हैं, जो शासन के साथ प्रभावी संवाद करने के साथ जरूरत पड़ने पर आंदोलन को निर्णायक दिशा दे सके। आने वाले महीनों में संगठनात्मक गतिविधियां तेज होने और चुनाव को लेकर नए समीकरण बनने की संभावना है।
फिलहाल प्रदेश के करीब 11 हजार पंचायत सचिवों की निगाहें समिति की रिपोर्ट और शासन के फैसले पर टिकी हैं। अब देखना होगा कि शासन इस मांग पर क्या रुख अपनाता है और सचिव संगठन आगे की लड़ाई के लिए कौन-सी रणनीति तैयार करता है।

