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डीजे वाले बाबू पर अब अदालत भी सख्त:रायपुर के जिला जज ने डीजे के शोर पर संज्ञान लिया, आयोजकों-संचालकों पर कार्रवाई के निर्देश

डीजे के कानफाडू संगीत पर अदालत भी सख्त हो गई है। रायपुर के जिला जज और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष संतोष शर्मा ने इस शोर का संज्ञान लिया है। उन्होंने पुलिस काे इस मामले में आयोजन समिति और डीजे संचालकों पर कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया है। रायपुर जिले में यह पहला मामला है जब जिला जज ने पुलिस को इस तरह की कार्रवाई का निर्देश दिया हो।

बताया जा रहा है, 22-23 नवम्बर की रात रायपुर के सिविल लाइंस और गोल बाजार इलाकों में उर्स का आयोजन हुआ था। इस दौरान देर रात तक तेज आवाज में डीजे बजाया जा रहा था। एलएलबी के कुछ विद्यार्थियों ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में इसकी लिखित शिकायत की। उसके आधार पर जिला जज संतोष शर्मा ने रायपुर कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और दाेनों थानों के प्रभारियों को कार्यवाही का विस्तृत निर्देश जारी किया। उन्होंने कार्रवाई की जानकारी अदालत को भी देने को कहा है। जिला जज ने कहा है, जिस प्रकार शिक्षक कक्षा में कोलाहल अर्थात चिल्लाने वाले विद्यार्थियों को कक्षा से बाहर करके दण्ड देता है, उसी प्रकार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन मिलकर ध्वनि प्रदूषण अर्थात कोलाहल फैलाने वाले व्यक्तियों को सजा देने का कार्य करेगा।

उन्होंने कहा, किसी कार्यक्रम का सौंदर्य बोध, सांस्कृतिक एवं भारतीय वाद्य यंत्रों के माध्यम से विनम्रता एवं कर्ण प्रियता से भी किया जा सकता है। जिला रायपुर में किसी भी प्रकार का कोलाहल स्वीकार्य नहीं होगा। जिला जज ने आम लोगों से कहा है, अगर किसी प्रकार की ऐसी कोई घटना होती है तो उसकी सूचना तत्काल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण या जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन को प्रदान कर सकते हैं। उसपर शीघ्रता से कार्रवाई की जाएगी।

शोरगुल को परिभाषा बताई

अपने विस्तृत निर्देश में जिला जज संतोष शर्मा ने छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 1985 में दी गई परिभाषा का उल्लेख किया है। इसके तहत तीव्र संगीत जैसे बैण्ड, बेग-पाइप, क्लेरियोनेट, शहनाई ड्रम, बिगुल, ढ़ाल, डफ, डफड़ा, नगाड़ा, ताशा या झांझ पर या उससे निकाली गयी हो। उसमें कोई ऐसी तीव्र ध्वनि भी सम्मिलित है जो किसी अन्य वाद्य या साधन द्वारा निकाली गयी हो को सम्मिलित किया गया है। जिला जज ने ध्वनि प्रदूषण से जुड़े उच्चतम न्यायालयों के निर्णयों का भी हवाला दिया है।

आयोजकों-संचालकों को छह महीने तक जेल हो सकती है

जिला जज ने बताया है, छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण अधिनियम के तहत जो कोई नियमों का उल्लंघन करेगा अथवा ऐसा करने के लिए प्रेरित करेगा उसे अधिकतम छह महीने की जेल और एक हजार रुपए तक के जुर्माने की सजा हो सकती है। इसके तहत शोर बचाने वाले उपकरणों लाउडस्पीकर आदि को राजसात भी किया जा सकता है।

कलेक्टर कुछ क्षेत्रों को साइलेंस जोन भी घोषित कर सकते हैंजिला जज ने याद दिलाया है कि कोलाहल नियंत्रण कानून के तहत जिला मजिस्ट्रेट को कोलाहल प्रतिबंधित क्षेत्र (साइलेंस जोन) घोषित करने की शक्ति मिली हुई है। अगर वे वह लोक हित में ऐसी कार्यवाही करना आवश्यक समझते हों वहां समय-सीमा तय कर वे साइलेंस जोन घोषित कर सकते हैं। ऐसा करके संबंधित इलाके में शोरगुल को प्रतिबंधित किया जा सकता है।

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