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“सुशासन में दिव्यांग की मजदूरी बंद… पुलिस के भरोसे पेट या आश्वासन?”

रायपुर। एक ओर सरकार “सुशासन” और संवेदनशील प्रशासन का दावा करती है, तो दूसरी ओर हकीकत ऐसी तस्वीर पेश कर रही है, जो व्यवस्था की संवेदनहीनता पर सवाल खड़े करती है। मामला रायपुर के खमतराई थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां सतनामी समाज के दिव्यांग युवक दीपक जांगड़े पिछले कई महीनों से अपने ही मेहनत की कमाई के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।प्राप्त जानकारी के अनुसार दीपक जांगड़े, जिनका एक पैर पूर्णतः निष्क्रिय है, मार्च 2025 से खमतराई थाना में डाटा ऑपरेटर के रूप में कार्यरत थे। आरोप है कि उनकी दो माह की मासिक वेतन राशि पुलिस प्रशासन द्वारा रोक दी गई है। पीड़ित का कहना है कि जब उन्होंने अपने मेहनताना की मांग की, तो संबंधित अधिकारी सउनि द्वित कुमार साहू द्वारा स्पष्ट रूप से यह कह दिया गया कि “पैसा नहीं दूंगा।”

पीड़ित दीपक जांगड़े ने इस मामले की शिकायत थाना प्रभारी भनपुरी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहरी एवं ग्रामीण), पुलिस अधीक्षक सहित कई जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों तक पहुंचाई। लेकिन अब तक कार्रवाई के नाम पर केवल आश्वासन ही मिला है।
दिव्यांग होने के बावजूद मेहनत कर अपना जीवन चलाने वाले दीपक आज मानसिक और आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। त्योहारी माहौल में जहां हर घर में खुशियां मनाई जा रही हैं, वहीं पीड़ित के घर में चूल्हा जलाना भी मुश्किल हो गया है।

सवाल यह है कि क्या यही वह “सुशासन” है, जिसकी बात मंचों से बार-बार दोहराई जाती है? यदि एक दिव्यांग कर्मचारी को उसकी मेहनत की कमाई पाने के लिए भी संघर्ष करना पड़े, तो यह व्यवस्था की संवेदनशीलता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
समाज के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर पीड़ित दिव्यांग युवक को उसका बकाया वेतन जल्द दिलाया जाए और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।

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