दंतैल हाथी का आतंक, महुआ बीन रहे ग्रामीण को कुचला, महिला का हाथ उखाड़ा…
अंबिकापुर. बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के 2 गांव में दल से बिछड़कर घूम रहे दंतैल हाथी के हमले में महिला व पुरुष की मौत हो गई है। दरअसल छतवा वन परिक्षेत्र अंतर्गत 10 हाथियों का दल विचरण कर रहा है। इस दल से एक दंतैल हाथी बिछड़ गया और गांव में पहुंच गया। सोमवार शाम करीब 7 बजे फुलवार पहुंचा। जहां खेत में उस्मान अंसारी (50) अपनी पत्नी अस्मीना (46) के साथ काम कर रहा था।
इसी बीच दंतैल ने उस्मान पर हमला कर दिया। यह देख पत्नी उसे बचाने हाथी से भिड़ गई, लेकिन दंतैल ने महिला का बायां हाथ उखाड़ दिया। ग्रामीणों ने किया चक्काजाम : हाथी के हमले के बाद मंगलवार की सुबह काफी संख्या में ग्रामीण ग्राम छतवा स्थित डिप्टी रेंजर कार्यालय के पास पहुंचे और घेराव करते हुए चक्काजाम कर दिया। सूचना मिलते ही रेंजर संतोष पांडेय व एसडीओपी बाजीलाल सिंह मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाइश देकर शांत कराया।
नई तकनीकों के बावजूद समाधान नहीं, समस्या जस की तस
पति अस्पताल में
महिला का हाथ खेत में पड़ा था और काफी खून बह रहा था। इससे बेहोश हो गई। घायल पति-पत्नी को रामानुजगंज अस्पताल से अंबिकापुर मिशन अस्पताल रेफर किया गया। यहां महिला की मौत हो गई, जबकि पति का इलाज जारी है। इधर दंतैल हाथी फुलवार गांव से निकलकर अलसुबह करीब 3 बजे ग्राम रामपुर पहुंचा और खेत में महुआ बिन रहे दुर्गा प्रसाद (48) को कुचलकर मार डाला। दुर्गा प्रसाद कमिश्रर ऑफिस में प्यून के पद पर पदस्थ है।
तकनीक के बावजूद समाधान नहीं
वन विभाग ने हाथियों की निगरानी के लिए सैटेलाइट आधारित ’एलिफेंट ऐप’ शुरू किया है, जिससे उनके मूवमेंट की जानकारी हाथी मित्र दल को दी जाती है। लेकिन इसके बावजूद संघर्ष नहीं थम रहा है।
वन विभाग ने हल्का करंट लगाकर हाथियों को गांवों से दूर रखने की योजना बनाई थी, लेकिन यह धरातल पर लागू नहीं हो सकी।
तकनीक के…
माना जाता है कि हाथी मधुमक्खियों से डरते हैं, इसलिए जंगल में मधुमक्खियों के छत्ते लगाए गए। लेकिन इसका भी लाभ नहीं हुआ।
जंगल में हाथियों के लिए चारा देने की योजना बनी, ताकि वे गांवों में न घुसें, लेकिन यह भी कारगर नहीं रही।
प्रशिक्षित हाथी, जो बिगड़ैल हाथियों को नियंत्रित करने के लिए कर्नाटक से लाए गए थे, वे भी सफल नहीं हुए।
छह हाथियों को रेडियो कॉलर पहनाया गया था, लेकिन अब किसी भी हाथी के गले में कॉलर नहीं है।
खेतों में पुतले खड़े करने और हाथियों के गले में घंटियां बांधने की योजनाएं भी असफल रहीं।