जल संसाधन विभाग के ENC की संविदा नियुक्ति पर सवाल …?
रायपुर। छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग में एक बार फिर संविदा संस्कृति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विभाग ने 6 जुलाई 2025 को सेवानिवृत्त प्रमुख अभियंता इन्द्रजीत उईके को संविदा पर विभागाध्यक्ष पद का कार्यभार सौंप दिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शासन ने 22 जुलाई 2025 के आदेश से उन्हें पूरे वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार भी दे दिए जबकि यह शासन के ही पूर्व आदेशों के सीधे-सीधे विरुद्ध है।
मामला इसलिए और गंभीर हो जाता है क्योंकि 07.07.2022 के विभागीय आदेश और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के आदेश (याचिका क्रमांक 3451/2022, दिनांक 12.08.2022) में साफ निर्देश हैं कि सेवानिवृत्त अधिकारी को संविदा पर रखने के बाद उसे आहरण एवं संवितरण (D.D.O) का अधिकार नहीं दिया जाएगा। यह अधिकार केवल नियमित राजपत्रित अधिकारियों को ही दिया जा सकता है।
इसके अलावा सामान्य प्रशासन विभाग का परिपत्र दिनांक 05.08.2006 यह भी स्पष्ट करता है कि सेवानिवृत्ति के बाद संविदा पर कार्यरत अधिकारी किसी भी स्थिति में शासकीय सेवक की श्रेणी में नहीं माना जाएगा।लेकिन जल संसाधन विभाग ने इन सभी नियमों, परिपत्रों और न्यायालयीन आदेशों को धता बताते हुए सेवानिवृत्त अधिकारी को विभागाध्यक्ष जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त कर दिया। यही नहीं साथ ही उन्हें विभाग की तिजोरी की चाबी भी सौंप दी गई है।
ऊईके का भविष्य: जनवरी में संविदा खत्म,लेकिन एक्सटेंशन की जुगतें तेज
जल संसाधन विभाग में सेवानिवृत्त प्रमुख अभियंता इन्द्रजीत ऊईके की संविदा जनवरी में खत्म हो रही है, लेकिन विभागीय गलियारों में उनके एक्सटेंशन की जोरदार हलचल जारी है। फाइलों की रफ्तार बढ़ी है, मुलाकातों का दौर तेज है और अंदरखाने सेटिंग–मैनेजमेंट की चर्चा गर्म। वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि अगर एक्सटेंशन मिला तो संविदा राज और मजबूत होगा, नहीं मिला तो विभाग में कई दबे हुए फैसले उजागर हो सकते हैं।
विभाग में भूचाल, पदोन्नति प्रक्रिया ठप
वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि विभाग में वर्षों से पदोन्नति प्रक्रिया को जानबूझकर रोका जाता रहा है। योग्य और कार्यरत अधिकारी प्रमोशन के इंतजार में लाइन लगाकर बैठे हैं, लेकिन विभाग शीर्ष पदों को सेवानिवृत्ति क्लब का आरामघर बना चुका है। इससे विभाग के भीतर भारी रोष छाया हुआ है। अधिकारियों का आरोप यह भी है कि विभागीय हित को पीछे कर, व्यक्तिगत हितों को आगे बढ़ाने की परंपरा ने अब जल संसाधन को संविदा संसाधन में बदल दिया है।
मुख्यमंत्री से दखल की मांग
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को भिलाई विधायक देवेंद्र यादव के द्वारा भेजे गए पत्र में मांग की गई है कि विभागाध्यक्ष पद पर संविदा नियुक्ति की प्रक्रिया तुरंत रोके जाए,और विभाग में लंबित पदोन्नतियों को तत्काल नियमित रूप से पूरा किया जाए।

ENC के साथ AC नाम के लायजनर के घनिष्ठ संबंधों को लेकर चर्चा
विभाग में चर्चाए है की AC लायजेनर ही विभाग में कमीशन का काम देखता है ठेकेदारों से वसूली कर किसे कितना पहुंचाना है तय करता है कौन है AC कैसे सिंडिकेट को संचालित करता है अगली खबर तक इंतजार कीजिए…

