मनोवैज्ञानिक तरीके से बच्चों की छोड़ाई जाएगी ,मोबाइल की लत…..

गरियाबंद  – विगत वर्षों में कोरोना के कारण स्कूलों में आनलाइन पढ़ाई की वजह से अधिकांश बच्चों को मोबाइल की लत लग गई है। इससे उनकी भौतिक कार्यदक्षता कम हो रही है और मोबाइल से होने वाले दुष्प्रभाव का सामना उन्हें करना पड़ रहा है। ऐसे में बाल संरक्षण आयोग ने मोबाइल की लत से बच्चों को बचाने के लिए मनोवैज्ञानिकों की मदद एक विशेष कार्यक्रम तैयार किया है। जो जल्द ही सभी स्कूलों में चलाया जाएगा। इसमें बच्चों की भौतिक कार्यदक्षता पर ज्यादा जोर दिया जाएगा।

शुक्रवार को छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष तेजकुंवर नेताम ने इसकी जानकारी दी। वे बाल अधिकार पर समीक्षा सह उन्मुखीकरण कार्यशाला के लिए गरियाबंद पहुंची थी। कार्यशाला में उन्होंने बताया की आनलाइन पढ़ाई की वजह से अधिकांश बच्चों में मोबाइल की लत लग गई है। इससे उनकी भौतिक कार्यदक्षता कम हो रही है। आजकल तो बच्चे क्राउलिंग करते हैं उसी समय से धीरे-धीरे मोबाइल के अभ्यस्त हो जाते हैं। ऐसे में हमने मनोवैज्ञानिकों की राय लेकर ब्रोशर तैयार किया है और कार्यक्रम बनाया है। क्लस्टर लेवल पर मास्टर ट्रेनर इस संबंध में शिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे और स्कूलों में बच्चे को एक्टिविटी कराई जाएगी। उन्होंने अभियान की सफलता हेतु शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभाग की बेहतर भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की है।

इस दौरान बैठक में आयोग के एजेंडा पर चर्चा की। पाक्सो एक्ट के मामलों की भी विशेष समीक्षा की गई। अध्यक्ष ने कहा कि हर थाने में बाल कल्याण अधिकारी हो और वे यह सुनिश्चित करें कि बधाों और पेरेंट्स की बेहतर काउंसिलिंग हो। उन्होंने कहा कि बच्चे को मानसिक संबल दिया जाना जरूरी है ताकि वो मजबूत रह सके। इसके लिए थानों में नियमित रूप से बच्चों के मनोविज्ञान के मुताबिक उनसे व्यवहार करने को लेकर प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। आयोग के सचिव प्रतीक खरे ने कहा कि थानों में स्टाफ को प्रशिक्षित किया जाना जरूरी है ताकि हमेशा ही विवेचना के साथ बेहतर काउंसिलिंग की संभावना बनी रहे। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी को अनिवार्य तथा मुक्त शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के जिले में बेहतर क्रियान्वयन पर आवश्यक पहल करने कहा। साथ ही 15 सितम्बर तक शत प्रतिशत स्कूली बच्चों को कोविड वैक्सीनेशन कराने पर जोर देने की बाते कही। उन्होंने यह भी कहा कि पोषण पुनर्वास केंद्र में बधाों की संख्या ज्यादा न हो, इस पर महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा विशेष ध्यान दे। जिले में बाल विवाह एवं बाल श्रम उन्मूलन तथा बाल अधिकारों से संबंधित बिन्दुओं पर आवश्यक पहल

होना चाहिए। इस दौरान आयोग के सदस्य अगस्टिन बनार्ड, अधिवक्ता डा. कल्पना देशमुख, जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष कृष्ण कुमार शर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी अशोक पाण्डेय सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। बैठक में महिला एवं बाल विकास के अलावा पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज कल्याण, श्रम, आबकारी विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

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