कृषि वैज्ञानिकों एवं उन्नतशील किसानों के अतिथि गृह को IAS ने किया कब्ज़ा

 रायपुर। सरकार द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं का बेजा इस्तेमाल करना तो आईएएस अधिकारियों से सीखना चाहिए…। अगर यकिन ना हो तो कृषि विभाग के उस वातानुकूलित गेस्ट हाउस का दीदार करें जिसे सरकार ने कृषि वैज्ञानिकों एवं उन्नतशील किसानों के लिए बनाया है… जो छत्तीसगढ़ के निम्न व मध्यम वर्गीय किसानों को प्रशिक्षण देते हैं…. ताकि अपनी जमीन को उपजाऊ बनाकर लाभ कमा सके…। किन्तु 7 कमरों वाले उच्च स्तरीय वातानुकूलित गेस्ट हाउस का आनंद अब उन्नतशील किसानों और कृषि वैज्ञानिकों को नहीं मिल पाएगा…। क्योंकि अब उन 7 कमरों वाले गेस्ट हाऊस का आनंद तीन माह पूर्व जांजगीर-चांपा से आये कृषि संचालक यशवंत कुमार अपने परिवार के साथ उठा रहे हैं…।

दरअसल जांजगीर-चांपा से स्थानांतरित होकर आए यशवंत कुमार को राज्य कृषि प्रशिक्षण अकादमी के गेस्ट हाऊस को अस्थायी रूप से कुछ दिनों तक ही उपयोग में लाना था… जब तक उनका स्थाई निवास: का समाधान नहीं हो जाता… किन्तु वतानुकूलित गेस्ट हाऊस का वातावरण उन्हें इतना भाया कि उन्होंने गेस्ट हाऊस को ही अपना स्थायी आशियाना बना डाला। यहां तक कि उस गेस्ट हाऊस में हॉईटेक मॉड्यूलर किचन, स्टोर हाऊस, शेड निर्माण अहाता सहित रंग रोगन तक करवा डाला… मात्र एक प्रस्ताव पास करके ।

अब आप सोच रहे होंगे बाहर से काई आने वाले कृषि वैज्ञानिकों और उन्नतशील किसानों के ठहरने-खाने का इंतजाम का क्या…? तो चौंकिए मत… उनका भी इंतजाम है…। उन्हें किसी आलिशान होटलों में आवास व भोजन की व्यवस्था सरकारी खजाने से करा दी जाती है ताकि उन्हें भी कोई शिकायत ना हो… किन्तु सवाल उठता है कि उनकी व्यवस्था महंगे होटलों में कर… सरकारी खजाना खाली करने के लिए जिम्मेदार कौन होगा…? अब तक तय नहीं किया गया है…। यंहा लूट मचाने वालो के लिए आमजनों का कोई लेना देना नही… मीडिया मैनेज है… अधिकारी को अधिकारी का ही साथ देना है… मातहत कर्मचारी बेबस हैं… कृषि सचिव बेखबर है… विभागीय मंत्री के संज्ञान में मामला है नहीं…. सरकार की स्थिति डांवाडोल है… इसलिए मनमानी का मंजर बदस्तुर जारी है…!

मजेदार बात यह है कि 7 कमरों वाले राज्य कृषि प्रशिक्षण अकादमी के वातानुकूलित गेस्ट हाऊस में बिना प्रस्ताव पास हुए दस लाख की लागत से निर्माण कार्य स्वीकृति के पूर्व ही शुरु हो चुका था…ऐसी चर्चा आम है… संचालक के निर्देश पर प्रस्ताव बनाने वाले अपर संचालक जी के निर्माम ने प्रस्ताव बनाकर संचालक को पेश किया… और उस गेस्ट हाऊस का आनंद लेने वाले संचालक ने अपने ही हस्ताक्षर से उस प्रस्ताव को पास कर स्वीकृति भी दे दी… किसने किसको उपकृत किया…? किया तो क्यों किया…? वह भी जांच का विषय है…! सरकार की वर्तमान स्थिति से सभी वाकिफ हैं…। ‘ऑल ईज वेल’ कहीं दिखता नहीं… शायद इसी का फायदा नौकरशाह भी उठा रहे हैं…। इन अधिकारियों को लगता है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अब तब के मेहमान हैं… आने वाले को साध लिया जाएगा. किन्तु नियम बनाने वाले अधिकारी ही नियमों का उल्लंघन करें… तो सवाल उठेंगे ही… कि लगाम किसके हाथ है…?

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